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मेरी खुद्दारी ने केवल सर झुकाया दो जगह या कोई मज़लूम हो या साहिबे-किरदार हो



रजनीश / ज्ञान प्रकाश 

करनैलगंज(गोंडा)। मेरी खुद्दारी ने केवल सर झुकाया दो जगह या कोई मज़लूम हो या साहिबे-किरदार हो। ये पंक्तियां है अदम गोंडवी की। नगरपालिका परिषद करनैलगंज के सभागार में अदम गोंडवी की जयंती धूमधाम से मनाई गई।


जिसकी अध्यक्षता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम अचल आचार्य ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व जिलाधिकारी रामबहादुर तथा विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत आईएएस वीके सिंह व राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखर, धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव, अनिल त्रिपाठी रहे। 


कार्यक्रम का संयोजन अनुभूति साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक ट्रस्ट के अध्यक्ष अवधेश सिंह व संचालन वरिष्ट शायर अज़्म गोंडवी ने किया। 


बतौर मुख्य अतिथि पूर्व जिलाधिकारी रामबहादुर ने अपने उद्बोधन में अपने कार्यकाल के तमाम अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि मैंने अदम जी को पद्मश्री के लिये भी संस्तुति भेजा था जो आज भी विचाराधीन है। 


उन्होंने कहा गोंडा कई मायनों में विशेष है, गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मस्थली यहां है, असगर साहब की जन्मभूमि व जिगर साहब की कर्मभूमि यही है, कृषि बैज्ञानिक घाघ जी का जीवन यही बीता है औऱ इसी धरती ने अदम जैसे ब्यक्ति को भी दिया है। उन्होंने कहा अदम के बारे में जितना भी कहा जाय कम है।


वरिष्ठ पत्रकार व लेखक धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि मेरा सौभाग्य 2017 में उस समय जगा जब गोंडा में बतौर मुख्य अतिथि रामबहादुर के हाथों से मुझे अदम गोंडवी स्मृति सम्मान मिला। 


उसी तिथि से मेरे नाम के साथ अदम जी का नाम जुड़ना मुझे सामान्य से विशेष बना दिया। जयदीप सिंह सरस की वन्दना से शुरू हुई गोष्ठी को वीरेंद्र विक्रम तिवारी बेतुक, डा. अवधेश गोस्वामी, कौतुक गुप्ता, पुष्पा बेदान्ती, भगवानबक्स सिह रत्न, कांग्रेस नेता त्रिलोकी नाथ तिवारी, अवधराज वर्मा करुण, कांग्रेस नेता प्रमोद मिश्र, सुभाष सिह, मुजीब सिद्दीकी, कृष्णकुमार सिंह दीप, अब्दुलगफ्फार ठेकेदार, किसान नेता गजराज सिंह, कुमारी पुनीता मिश्रा, अकील सिद्दीकी, डा अरुण कुमार सिंह, इफ्तिखार अंसारी, जकी बक़ाई, उत्तम कुमार शोला आदि ने गद्य व पद्य में अपने विचार प्रकट किए।

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