बाग़ी की बगावत ने बढ़ा दी मुश्किल, दो टुकड़ों में बट गयी सपा


                   मंच से बोली गई बात


रमेश कुमार मिश्रा 

गोंडा ( नगर पंचायत )सियासी लड़ाई में सत्ता का मोह और अपनों से बग़ावत राजनीति का मूल स्वभाव है और यही स्वभाव धानेपुर के नगर पंचायत के चुनाव में अहम भूमिका निभाता दिख रहा है। 


एक तरफ पार्टी का प्रेशर है तो दूसरी तरफ दिग्गज सपाइयों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, समाजवादी पार्टी ने एक बार शाहिद अली सिद्दीकी की पत्नी आसमा सिद्दीकी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था, तब ये माना जा रहा था की निकटम प्रतिद्वंदी से कांटे की टक्कर होगी लेकिन पार्टी ने फेरबदल करके अपरिपक्व उम्मीदवार शहान अख्तर राइनी की पत्नी सलीका खानम को प्रत्याशी घोषित कर दिया, इस फेर बदल से समाजवादी पार्टी से दो बार मेहनौन की विधायक रही श्रीमती नन्दिता शुक्ला के परिवार की नाराजगी साफ़ देखने को मिली, इसका कारण सपा से टिकट के लिए शाहिद अली की पैरवी किया जाना और फिर प्रत्याशी का बदला जाना है।


जिसके चलते शुक्ला परिवार ने इस चुनाव से दूरी बना ली, जिसकी भरपाई के लिए जिले के बड़े दिग्गज नेताओं को सपा प्रत्याशी के समर्थन में उतरना पड़ा, पूर्व मंत्री स्वर्गीय पंडित सिंह के राजनैतिक वारिस सूरज सिंह, मसूद आलम खा, बाबूराम पाल सिंह की पुत्रवधू प्रतिभा सिंह व पौत्र विष्णु प्रताप सिंह ने सपा प्रत्याशी के लिए पसीना बहाना शुरू कर दिया है, धानेपुर में जन सम्पर्क कार्यालय उद्घाटन के मौके पर प्रतिभा सिंह ने मुस्लिम वोटों पर फोकस किया और बाकी जातियों के वोटरों पर उन्होंने विश्वास नही जताया, सूरज सिंह और मसूद आलम खाँ भी उसी समीकरण पर टिके रहे।



दूसरी तरफ बगावत की दुंदुभी बजा चुके शाहिद अली ने निर्दलीय राह पकड़ ली और सपा के ही खेमे को कमजोर करने के लिए कुटिल निति अपना ली है, माना जाता है की इन दोनों की आपसी लड़ाई में कद्दावर राजनैतिक परिवार की दूरी के कारण दो टुकड़ों में बट चुकी समाजवादी पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।



समाजवादी पार्टी से दो बार विधायक रहीं श्रीमती नन्दिता शुक्ला ने कहा है की टिकट में फेरबदल किये जाने का निर्णय पार्टी का था, धानेपुर की जनता जागरूक है, जो बेहतर है उसी का चुनाव करके चेयरमैन बनाएगी परिणाम जो भी आएगा उसे जनादेश मान कर स्वीकार करना पड़ेगा।

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