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महराजगंज: महाव नाले के जर्जर बांध को लेकर किसान भयभीत, अफसर और नेता बने लापरवाह, ग्रामीणोंं के सामने आया ये नया संकट



उमेश तिवारी

महराजगंज जिले का महाव नाला मरम्मत के अभाव में कई स्थानों पर बाढ़ का दबाव झेलने में असमर्थ रहेगा। इसकी चिंता ग्रामीणों को सता रही है।


बताते चलें कि महराजगंज जनपद के नौतनवा तहसील क्षेत्र का महाव नाला आजादी के 75 साल बाद भी किसानों पर कहर बरपा रहा है। वर्षांत में यह पहाड़ी नाला भयंकर बाढ़ के साथ साथ सिल्ट भी लेकर आता है और दर्जनों गांवों के किसानों की हजारों एकड़ धान की फसल नष्ट कर चला जाता है। 



जबकि इस नाले पर हर साल मरम्मत के लिए सरकार करोड़ों रुपए व्यय करती है पर इस पर कोई काम नहीं होता है। सारा पैसा अधिकारी और नेता डकार जाते हैं। इस साल भी ग्रामीणों को महाव नाले का जर्जर बंधा देख डर सताने लगा है। मरम्मत के अभाव में कई स्थानों पर यह तटबंध बाढ़ का दबाव नहीं झेल पाएगा।



धान की खेती की तैयारी कर रहे किसान महाव के जर्जर तटबंध को देख सहमे हुए हैं। यह तटबंध बारिश के मौसम में हर साल तबाही मचा देता है।नेपाल से निकलकर यह पहाड़ी नाला सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरनाक माना गया है। बीते कई सालों से यह नाला बरगदवा और परसामलिक क्षेत्र के गांव के किसानों के लिए भारी तबाही का शबब बना हुआ है।



स्थानीय निवासी किसानों ने पत्रकारों को बताया की जंगल में सफाई के अभाव में नाले का प्रवाह मार्ग संकरा हो गया है। इसलिए उसमे पानी का प्रवाह सही से नही हो पाता है।और इसी कारण से जंगल के बाहर रेत से बने तटबंध खतरनाक मोड़ की वजह से एक साथ कई स्थानों पर टूट जाते हैं।



तीन विभागों के खेल में करोड़ों रुपए बर्बाद

तीन विभागों के बीच महाव तटबंध फंसे होने के कारण हर साल सिंचाई विभाग,वन विभाग और ग्राम पंचायत के अधिकारी बांध टूटने पर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने लगते हैं।इसका खामियाजा नाले के समीप गावों के किसानों को भुगतना पड़ता है। तीनों विभागों के खेल में करोड़ों रुपए पानी में बह जाते हैं।


बताया जाता है की महाव में नेपाल से क्षमता से अधिक पानी आना भी बड़ी समस्या है।श्रजिससे तटबंध टूटते हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है हर साल फसल बर्बाद होती है और नाले के आसपास के कई गांव पानी में डूब जाते हैं। लेकिन इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है।अफसर और नेता आश्वाशन की घुट्टी पिलाते रहते हैं।

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