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BALRAMPUR...डिवाइन पब्लिक स्कूल ने किया गुरुकुल कक्षा का प्रयोग

अखिलेश्वर तिवारी 
जनपद बलरामपुर नगर क्षेत्र में संचालित डिवाइन पब्लिक स्कूल ने शनिवार को एक अद्वितीय और प्रेरणादायक पहल करते हुए कक्षा 7 और 8 के सभी बच्चों को प्राकृतिक वातावरण में दो घंटे की विशेष पाठन कराया । विद्यालय प्रबंधक आशीष उपाध्याय द्वारा संचालित इस कक्षा में बच्चों को Active and Passive Voice अत्यंत सरल और रोचक तरीके से पढ़ाया गया।
29 नवंबर को डिवाइन पब्लिक स्कूल के बच्चों में प्राकृतिक गुरुकुल मॉडल की कक्षा को लेकर उत्साह देखते ही बन रहा था। खुले वातावरण, ताज़ी हवा और प्रकृति की शांत गोद में बैठकर पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों के चेहरे पूरे जोश एवं रुचि से भरे हुए दिखाई दिए। बच्चों ने स्वयं महसूस किया कि प्राकृतिक वातावरण में अध्ययन क्यों अधिक प्रभावी और मन को शांति देने वाला होता है।
प्राकृतिक स्थल पर ‘खुली कक्षा दिलाए गुरुकुल संस्कृति की याद

हमारे संवाददाता जब इस प्राकृतिक स्थल पर पहुंचे तो पहले तो उन्हें यह भीड़ देखकर आश्चर्य हुआ कि इतने बच्चे जंगल जैसी जगह पर क्यों इकट्ठा हैं। पास जाकर देखा तो स्पष्ट हुआ कि बच्चों के सामने एक व्हाइट बोर्ड लगाया गया है, और विद्यार्थी उसी अनुशासन के साथ जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं जैसे अपनी नियमित कक्षाओं में बैठते हैं। यह दृश्य प्राचीन गुरुकुल परंपरा की झलक दिखा रहा था, जहां ऋषि-मुनि प्राकृतिक स्थलों पर बैठकर शिक्षा दिया करते थे। आज उसी परंपरा का आधुनिक रूप डिवाइन पब्लिक स्कूल द्वारा पुनः जीवित किया गया है। प्रबंधक आशीष उपाध्याय ने बताया कि बच्चे “चार दीवारों में तो रोज़ पढ़ते हैं । जब प्रबंधक आशीष उपाध्याय से इस अनोखे आयोजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा:
“बच्चे रोज़ बंद कमरों में पढ़ते हैं। लेकिन उनका मन बदलने, उन्हें प्रकृति से जोड़ने और पढ़ाई को और अधिक रोचक व प्रभावशाली बनाने के लिए सप्ताह में एक दिन खुली प्राकृतिक कक्षा आयोजित की जाती है। इससे बच्चे न सिर्फ पाठ्यक्रम सीखते हैं बल्कि प्रकृति का महत्व और शांत वातावरण का लाभ भी समझते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को जंगल में बोर्ड लगाकर पढ़ाना केवल एक विशेष प्रयास नहीं, बल्कि शिक्षा को सार्थक और जीवंत बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।


शहर में पहली बार: ‘पिकनिक के जगह पढ़ाई’ के लिए प्राकृतिक स्थल का चयन

अक्सर देखा जाता है कि विद्यालय बच्चों को शैक्षिक भ्रमण के नाम पर केवल पिकनिक, खेल और मनोरंजन के लिए प्राकृतिक स्थलों पर ले जाते हैं, जबकि डिवाइन पब्लिक स्कूल ने इस जगह को कक्षा चलाने के लिए चुना। यह शहर में पहली बार देखा गया कि बच्चे प्रकृति की गोद में जमीन पर बैठकर इतनी ध्यानपूर्वक अध्ययन कर रहे थे ।संवाददाता के अनुसार बच्चे अत्यंत शांत, सालीन और पूरे मनोयोग से अध्यापन में लगे हुए थे। प्राकृतिक वातावरण में पढ़ाई करने से बच्चों को पाठ और भी अच्छी तरह समझ में आया। डिवाइन पब्लिक स्कूल अपने ऐसे नवाचारी कार्यों और अनुशासनप्रिय वातावरण के लिए जाना जाता है। प्रबंधक स्वयं अक्सर कक्षाओं में जाकर एक विद्यार्थी की तरह बैठते हैं, जिससे उन्हें पूरे अध्ययन-क्रम की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। यही कारण है कि विद्यालय आज नगर के सर्वोच्च विद्यालयों में गिना जाता है। प्रबंधक ने बताया कि विद्यालय का उद्देश्य केवल किताबें पढ़ाना नहीं, बल्कि शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक—तीनों प्रकार का विकास” करना है। प्राकृतिक कक्षा के माध्यम से विद्यालय ने यह सिद्ध भी कर दिया कि शिक्षा केवल कमरों में कैद नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में और भी ज्यादा प्रभावी हो सकती है।

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