अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर में कोतवाली देहात के चौकी श्रीनगर पुलिस का अमानवीय कृत्य सामने आया है । आपसी विवाद में हुई मारपीट की घटना में 33 वर्षीय गर्भवती महिला को चोट लगने से गर्भपात हो गया, जिसकी सूचना लिखित तहरीर के रूप में श्रीनगर चौकी पर दिया गया । पुलिस ने पीड़ित का मेडिकल भी कराया और मृतक नवजात शिशु का पोस्टमार्टम भी कराया परंतु एक माह बीत जाने के बाद भी पीड़िता का प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं किया । आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं । पीड़िता तथा उसके परिजन पुलिस चौकी का चक्कर लगा लगा कर थक चुके हैं । डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को भी पूरी घटना की जानकारी दी गई, परंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई । समाज की रक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस विभाग के अमानवीय रवैया से मायूस होकर पीड़ित ने न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है । एक और जहां योगी सरकार त्वरित न्याय तथा कड़े कानून व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर बलरामपुर पुलिस कड़ी कार्रवाई तो दूर पीड़ित की तहरीर पर एफआईआर लिखना भी मुनासिब नहीं समझ रही है ।
पीड़िता कन्या देवी पत्नी रमेश कुमार ने 29 जनवरी को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को रात्रि करीब 10 बजे उसके के पति रमेश कुमार व उनके भाई उत्तम प्रसाद के मध्य सम्पत्ति के हिस्सेदारी को लेकर आपस में विवाद कहा सुनी हो गया था । इसी रंजिश को लेकर उत्तम प्रसाद पुत्र शेषमन व उनकी पत्नी गीता निवासी ग्राम चन्ना चौकी थाना कोतवाली देहात जनपद बलरामपुर पीड़िता के दरवाजे पर आकर भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे । पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपियों ने जबरन घर में घुसकर पीड़िता को बुरी तरह लात मूका थप्पड़ लाठी डण्डा से मारने पीटने लगे । उसने हाथ जोड़कर विनती किया कि मुझे मत मारो मैं पेट से हूं लेकिन आरोपियों ने एक न सुनी और जानबूझकर पीड़िता के पेट पर दो तीन वार कर दिये, जिस कारण वह बेहोश हो गयी और आरोपी उसे मृत समझकर मौके से फरार हो गये। आरोपियों द्वारा मारने के कारण पीड़िता के गर्भ में पल रहे शिशु की भी मृत्यु हो गयी। पीड़िता ने पूरी घटना की सूचना श्रीनगर चौकी थाना कोतवाली देहात पर दिया । थाने की पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया परंतु कोई कार्यकही नहीं हुई । इसी दरमियान पीड़िता को मरी हुई बच्ची पैदा हुई जिसका पोस्टमार्टम पुलिस द्वारा कराया गया किन्तु आज तक आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी। पीड़िता ने घटना की सूचना पंजीकृत डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक बलरामपुर को दिया, किन्तु वहां से भी कोई कार्यवाही न होने पर पीड़िता ने न्यायालय की शरण में जाकर न्याय की गुहार लगाई है । पूरे घटनाक्रम पर पुलिस का पक्ष जानने का प्रयास दूरभाष पर किया गया परंतु संपर्क नहीं हो पाया ।
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