अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर में इन दिनों चारों तरफ रमजान की धूम दिखाई दे रही है । रोजेदार पूरी शिद्दत के साथ खुदा की इबादत में लगे हुए हैं । पाक रमजान महीना का अंतिम चरण चल रहा है, जिससे बाजारों में भी ईद से पूर्व तैयारी की रौनक बढ़ गई है । रमजान महीने का हर दिन अपने आप में काफी महत्व रखता है उन्ही में से एक है शब ए कद्र जिसके विषय में जिले के वरिष्ठ समाजसेवी चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अख्तर रसूल खान ने हमारे प्रतिनिधि को विस्तार से जानकारी दी ।
जिले के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ एवं समाज सेवी डॉ अख्तर रसूल खान ने 16 मार्च को बताया कि शबे कद्र इबादत, इनाम और दुआओं की रमजान की 27 में 27 वीं रात (लैलातुल कद्र) इस्लाम में सबसे पवित्र और बरकत वाली रात मानी जाती है, जो 1,000 महीनों से बेहतर है। माना जाता है कि इसी रात कुरान नाजिल हुई थी। 2026 में यह रात 16 मार्च की शाम से शुरू होकर सुबह तक रहेगी। मुसलमान इस रात नमाज, कुरान की तिलावत और इबादत के जरिए अल्लाह से माफी (तौबा) मांगते हैं।
शब-ए-कद्र (27वीं रात) की अहमियत और इबादत:
1000 महीनों से बेहतर: कुरान के अनुसार, इस रात की इबादत 83 साल 4 महीने से अधिक समय की इबादत से बढ़कर है। उन्होंने बताया कि यद्यपि यह रमजान के आखिरी 10 दिनों (21, 23, 25, 27, 29) की विषम रातों में से कोई भी हो सकती है, लेकिन अधिकतर लोग 27 वीं रात को ही शब-ए-कद्र मानते हैं। इस दिन रात भर जागकर नमाज पढ़ना (नफिल नमाज, तरावीह), कुरान पढ़ना, जिक्र करना और दुआएं मांगना शामिल है। इस रात "अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बल अफवा फअफु अन्नी" (हे अल्लाह, तू माफ करने वाला है और माफी को पसंद करता है, इसलिए मुझे माफ कर दे) का कसरत से जिक्र किया जाता है। कई लोग आखिरी 10 दिनों के लिए एतिकाफ (मस्जिद में एकांतवास) करते हैं। शब-ए-कद्र के दौरान की गई इबादतें बंदों के गुनाहों को मिटाती हैं और अल्लाह की रहमत बरसाती हैं। इस मुबारक रात के बाद ईद की तैयारियां और जोरो शोर से शुरू हो जाती है बाजारों में रौनक बढ़ जाती है ।
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