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BALRAMPUR...एमएलके कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

अखिलेश्वर तिवारी 
जनपद बलरामपुर में एम एल के पी जी कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता आश्वाशन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं नेशनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अवेयरनेस मिशन वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को महाविद्यालय सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह का शुभारंभ हुआ। दो दिनों तक चलने वाले इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रदेशों के प्रोफेसर व शोधार्थी द्वारा " उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकार" पर विधिवत चर्चा की जायेगी।
11 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह, मुख्य अतिथि डॉ राजू तिवारी असिस्टेंट कंट्रोलर पेटेंट डिज़ाइन वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली, महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव व सेमिनार के सरंक्षक कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य व सेमिनार के अध्यक्ष प्रो0 जे पी पाण्डेय तथा आई क्यू ए सी के कोऑर्डिनेटर प्रो0 एस पी मिश्र ने दीप प्रज्वलित एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। 
इसके पश्चात मां सरस्वती की वंदना, महाविद्यालय के कुलगीत तथा स्वागत गीत के माध्यम से समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई। उपस्थित प्रतिनिधियों व शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह ने कहा कि  भारतवर्ष की चित्त आध्यात्मिक व कर्म प्रधान है। भारतीय संस्कृति अतिप्राचीन है। ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ है, जो केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान का भी मूल स्रोत है। यह भौतिक विज्ञान , खगोल विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी का ज्ञान मंत्रों के माध्यम से प्रदान करता है। ऋग्वेद में निहित ज्ञान भारतीय ज्ञान परंपरा की उत्कृष्टता है, जो आधुनिक वैज्ञानिक खोजों के आधार के रूप में मान्य है। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार  व नाथपंथ के बारे में विधिवत जानकारी दी।
 मुख्य अतिथि डॉ राजू तिवारी ने संगोष्ठी के शीर्षक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों  में बौद्धिक संपदा अधिकार  शोध कार्यों, आविष्कारों और कॉपीराइट सामग्री की सुरक्षा व व्यावसायीकरण सुनिश्चित करते हैं। ये संस्थान पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के माध्यम से ज्ञान का प्रसार करते हैं। बौद्धिक संपदा नीति होना आवश्यक है जो शोधकर्ताओं के प्रोत्साहन और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखे। 
महाविद्यालय के प्राचार्य व संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो0 जे पी पाण्डेय ने स्वागत उदबोधन एवं अतिथियों का परिचय देते हुए कहा कि इस संगोष्ठी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों और संकाय सदस्यों को बौद्धिक संपदा के महत्व और उनके संरक्षण के तरीकों (पेटेंट, कॉपीराइट) के बारे में शिक्षित करना। नए ज्ञान की खोज और अनुसंधान को बढ़ावा देना, जिससे पेटेंट योग्य परिणाम प्राप्त हों। समन्वयक डॉ सदगुरू प्रकाश ने थीम पर संक्षिप्त जानकारी दी।आयोजन सचिव डॉ बजरंगी लाल गुप्त ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं डॉ स्वदेश भट्ट ने कार्यक्रम का संचालन किया।  डॉ राम रहीस, डॉ बसंत गुप्त एवं लेफ्टिनेंट (डॉ) देवेन्द्र कुमार चौहान ने रिपोर्टियर की भूमिका निभाई।  तकनीकी सत्र में गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो0 अजय कुमार शुक्ल ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकार" पर अपने विचार व्यक्त किये । इस अवसर पर मुख्य नियंता प्रो0 वीणा सिंह, डीन फैकल्टी ऑफ साइंस मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय प्रो0 आर के सिंह, डीन फैकल्टी ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर प्रो0 पी के सिंह, प्रो अरविन्द द्विवेदी, प्रो0 मोहिउद्दीन अंसारी, प्रो0 एस पी मिश्र, प्रो0 एस एन सिंह, प्रो0 पी सी गिरी, प्रो अशोक कुमार, प्रो0 रेखा विश्वकर्मा, डॉ ऋषि रंजन पाण्डेय,डॉ जितेन्द्र कुमार, डॉ कृतिका तिवारी, डॉ अनामिका सिंह, प्रो0 तबस्सुम फरखी, डॉ प्रखर त्रिपाठी व डॉ सुनील कुमार शुक्ल सहित सभी विभागों के अध्यक्ष, प्राध्यापक व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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