बहराइच। अगस्त माह के दूसरे पखवाड़े मे नियमित समयांतराल पर वर्षा हो रही है। इसके कारण गन्ना, धान, मक्का की फसलों में अच्छी बढ़वार हो रही है। केले की फसल में ज्यादा पानी नुकसान कर सकता है। ऐसे मौसम में किसानों को फसलों से कीट रोग से बचाव करना बहुत जरूरी है। धान की फसल की बोआई को लगभग 35 से 45 दिन हो गए हैं। खरपतवार उगने की दशा में किसान विस पायरी बैक सोडियम 10 प्रतिशत (नामिनी गोल्ड) दवा का 100 एमएल प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा व शाकाणु झुलसा में धान की पत्तियां किनारे से अंदर की ओर पीला या भूरा होकर सूखने लगती हैं। धीरे -धीरे पूरी पत्ती सूख जाती है। रोग का लक्षण दिखने पर किसान कार्बनडाजिम 50 प्रतिशत को 500 ग्राम व स्ट्रेप्टोसाइक्लिन सल्फेट 50 प्रतिशत को 15 ग्राम की दर से प्रति हेक्टेयर में 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
केला : केला की फसल में पानी की आवश्यकता कम होती है। किसान भाई केले की फसल में पानी का भराव न होने दें। पत्तियां या तने पर सड़न या पीला चकत्ता पड़ने की दशा में तत्काल कॉपर आक्सी क्लोराड 50 प्रतिशत की तीन किलोग्राम प्रतिहेक्टेयर की दर से 400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
मूंग व उरद : मूंग व उरद की फसल में मोजेक, सफेद मक्खी, सूड़ी कीट का प्रकोप देखने को मिलता है। यह कीट फसल की बेधकर नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिए किसान इमिडाक्लोप्रिड 0.5 प्रति लीटर लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर दें। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. आरडी वर्मा ने बताया कि फसल व कीटों के रोकथाम के लिए दवाएं सभी कृषि रक्षा इकाइयों में उपलब्ध हैं। किसान समय पर इनका प्रयोग कर फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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