विभागीय लोगों की मदद से ठेकेदार कर रहे करोड़ों का घोटाला
अखिलेश तिवारी
बलरामपुर ।। जनपद बलरामपुर के 300 से अधिक गांव के लगभग 80 हजार से अधिक परिवार भीषण बाढ़ की विभीषिका से ग्रसित हैं । बाढ़ राहत में जिला प्रशासन के साथ-साथ तमाम समाजसेवी संस्थाएं आगे आई और उन्होंने अपने संसाधन के अनुरूप राहत सामग्री मुहैया कराया । वही सरकारी धन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले राहत सामग्री में जमकर लूट मची हुई है । प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश की तो धज्जियां उड़ाई जा रही हैं । राहत सामग्री में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त हो चुका है । शासनादेश की माने तो 16 सामग्री राहत पैकेट के साथ वितरित की जानी है । इसके सापेछ जनपद बलरामपुर में 9 सामग्री बांटे जाने की बात जिला प्रशासन कर रहा है । उसमें भी राहत पैकेट में एक या दो सामग्री नहीं रखी जा रही है । इतना ही नहीं जो सामग्री रखी जा रही है उसके तौल में भी भारी कमी देखने को मिली है । बाढ़ राहत सामग्री वितरण में करोड़ों के भ्रष्टाचार किए जाने की आशंका जाहिर की जा रही है ।
जानकारी के अनुसार जिले की तीनों तहसील के 300 से अधिक गांव के 80 हजार से अधिक परिवार बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं । बाढ़ का पानी समाप्त होने के बाद राहत व बचाव कार्य जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा है । एक ओर जहां डॉक्टरों की कमी के चलते हैं लोगों को समुचित दवाएं नहीं मिल पा रही हैं वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन द्वारा राहत सामग्री मुहैया कराने के नाम पर जमकर बंदरबांट की जा रही है । इस बात की पुष्टि हमारे पड़ताल में उस समय हुई जब कृषि उत्पादन मंडी समिति में पैकेजिंग कर रहे ठेकेदारों के पैकेट्स को चेक कराया गया । तो उसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए जाने का मामला प्रकाश में आया । तैयार किए गए पैकेट्स में नौ के जगह पर केवल सात सामग्री रखी गई थी । उसमें किसी भी सामग्री का वजन मानक के अनुरूप नहीं था । मसलन 2 किलो चना की जगह 1 किलो 800 ग्राम, 2 किलो अरहर की दाल की जगह 1 किलो 800 ग्राम, 10 किलो चावल की जगह 9 किलो 500 ग्राम, 10 किलो आटा की जगह 9 किलो 500 ग्राम रखा जा रहा था । आश्चर्य तो इस बात का है की 1 लीटर रिफाइन के नाम पर 750 एमएल के पैकेट रखे गए थे जो किसी ब्रांडेड कंपनी के भी नहीं थे । अमूमन 750 ईमेल के रिफाइन की पैकेट कोई भी कंपनी नहीं बनाती है राहत पैकेट में रखने के लिए 750 एमएल के पैकेट स्पेशल ऑर्डर देकर ही बनवाए गए होंगे । इसके अलावा सब्जी मसाला वह पारले बिस्कुट पैकेट से गायब थे । जिला प्रशासन की माने तो एक पैकेट की कीमत 815 रुपए रखी गई है जब कि उसमें रखी गई सामग्री की कीमत लगभग ₹650 के आसपास है । इस हिसाब से प्रत्येक पैकेट ₹150 से अधिक की बचत ठेकेदारों द्वारा की जा रही है । जनपद में अब तक 71,000 परिवारों को राहत सामग्री की पैकेट मुहैया कराई जा चुकी है । ऐसे में करोड़ों की हेराफेरी अब तक की जा चुकी है । यह क्रम अभी भी लगातार जारी है । जानकारों की माने तो यह सभी गोरखधंधा सरकारी अमले के सामने किया जा रहा है । राहत सामग्री की पैकेट बनाते वक्त वहां पर खाद्य एवं रसद विभाग का एक सुपरवाइजर मौजूद रहता है । उसी के सामने ही यह सारा गोरखधंधा फल-फूल रहा है । हमारे पड़ताल में जब यह बात सामने आई और वहां मौजूद मार्केटिंग विभाग के एक सुपरवाइजर से बात की गई तो उसन माना कि सभी पैकेट में घटतौली की गई है । साथ ही उसने अपना बचाव करते हुए कहा इसमें जो सामग्री कम रखी गई है उसकी वजन हमारे सामने नहीं हुई है । अब सवाल ये उठता है कि इतना कह देने से वजन तो पूरा नहीं होगा ।राहत सामग्री वितरण के नाम पर मची लूट के विषय में जब जिलाधिकारी राकेस कुमार मिश्र से बात की गई तो उनका जवाब संतोषजनक नहीं रहा । शासनादेश के अनुसार 16 सामग्री राहत पैकेट में रखे जाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह सभी सामग्री बाढ़ क्षेत्र में उपलब्ध करा पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है । इसलिए जिला प्रशासन द्वारा 9 सामग्री मुहैया कराई जा रही है । राहत पैकेट में नौ की जगह सात सामग्री रखे जाने पर उन्होंने जांच की बात कही । सामग्री में घटतौली किये जाने के प्रश्न पर जिलाधिकारी ने कहा कि हम रैंडम चेकिंग करवाते हैं और यदि सामग्री का वजन कम मिली तो उसे पूरा करा कर ही वितरण कराया जाता है । जिला अधिकारी का अस्पष्ट जवाब गले से नीचे उतरने वाली नहीं है ।


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