कानपुर। जिले में सरसैया घाट अंतर्गत जनाजा घाट पर सगे मासूम भाइयों की हत्या के मामले में एडीजे तीन की कोर्ट ने बुधवार को पड़ोसी को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने 10 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। 30 दिन में आरोपी हाईकोर्ट में अपील कर सकता है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) राजेश्वर तिवारी ने बताया कि सरसैया घाट निवासी कबाड़ का काम करने वाले टिंकू पाल के पड़ोस में रिक्शा चलाने वाला राजेश मांझी रहता है। 28 अगस्त 2013 को राजेश के बेटे शिवम की बीमारी से मौत हो गई थी। राजेश को शक था कि टिंकू ने जादू टोना करके उसके बेटे को मार दिया। 29 अगस्त को टिंकू के बच्चे गोलू, साहिल (07)और कार्तिक (05) खेल रहे थे। तभी राजेश मांझी ने बदला लेने के लिए पहले साहिल और फिर कार्तिक की गर्दन चाकू से काट दी। इससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। दो बच्चों को मारने के बाद राजेश गोलू को मारने के लिए दौड़ा तो भीड़ ने उसको दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया। टिंकू की शिकायत पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। 15 सितंबर को राजेश मांझी पर आरोप सिद्ध हो गया था। बुधवार को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-3 (एडीजे तीन) ज्योति कुमार त्रिपाठी ने राजेश को फांसी की सजा सुनाई। 30 दिन में आरोपी हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। सजा की पुष्टि के लिए पूरा मामला हाईकोर्ट भेजा जाएगा।
कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी: कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि समाज के लिए खतरा उत्पन्न किया गया। घटना के साथ ही लोगों ने डरकर स्थान छोड़ दिया। घरों के दरवाजे तक बंद हो गए। इसलिए अभियुक्त शेष बचे परिवार और समाज के लिए एक खतरा है। जेल से बाहर आकर आरोपी वहशीपन में अन्य व्यक्तियों की भी हत्या कर सकता है। इसलिए इसे आजीवन कारावास की सजा देना अपर्याप्त होगा। अभियुक्त क्रूर, पाशविक, राक्षसी है। सुप्रीम कोर्ट के दो केस का हवाला दिया: एडीजीसी राजेश्वर तिवारी ने बताया कि कोर्ट के सामने 2015 के सुप्रीम कोर्ट फुल बेंच केस बसंता संपत धोकरे बनाम महाराष्ट्र सरकार की रूलिंग को रखा गया। इसमें चार वर्ष की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इसके साथ ही 2003 के सुप्रीम कोर्ट के केस ओम प्रकाश उर्फ राजा बनाम स्टेट ऑफ उत्तरांचल की रूलिंग को भी रखा गया। इसमें घर के नौकर ने तीन लोगों की हत्या कर दी थी। मुझे नहीं देखना दरिन्दे का चेहरा: कोर्ट के बाहर मायूस बैठी साहिल और कार्तिक की मां हीरा देवी ने कहा कि मुझे दरिन्दे का चेहरा तक नहीं देखना है। भगवान करे इसे तुरंत मार डाला जाए, तभी मेरे बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। टिंकू ने कहा कि बेवजह के शक के चलते मेरे बेटों को मौत के घाट उतार दिया। राजेश को तो भरे बाजार फांसी पर लटकाना चाहिए। कम से कम लोगों को सबक तो मिले। राजेश ने गांव और जिले का भी ख्याल नहीं किया। टिंकू और राजेश दोनों ही बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले हैं। 13 वर्ष बाद सुनाई गई फांसी की सजा: इससे पहले आठ जनवरी 2004 को जिला जज शैलेंद्र सक्सेना की कोर्ट ने डीएवी कॉलेज के पूर्व महामंत्री चक्रेश अवस्थी की हत्या में फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। बुधवार को 13 वर्ष बाद दोबारा किसी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
भाई ने पूरे एक्शन में दी कोर्ट में गवाही : राजेश मांझी को कोर्ट ने फांसी की सजा साहिल और कार्तिक के पिता, भाई और पड़ोसी की गवाही पर सुनाई है। किसी तरह से राजेश मांझी के चंगुल से बचकर भागे गोलू ने कोर्ट को पूरा घटनाक्रम बताया। उसने एक-एक एक्टिंग करके जज के सामने पूरे घटनाक्रम की सीन कॉपी दिखाई। गोलू ने बताया कि सीधे चाकू से गर्दन काट दी। वहीं पड़ोसी मंटू मांझी और पिता टिंकू पाल ने भी गवाही दी। गोलू ने बताया कि वह कंचा खेल रहा था और उसका भाई चावल व सब्जी खा रहा था। तभी राजेश ने हमला बोल दिया। पोस्टमार्ट के दौरान कार्तिक के अमाशय से बिना पचा खाना मिला था। इससे स्पष्ट है कि गोलू की गवाही सही है। किसी भी तरह की चेहरे पर सिकन नहीं : फांसी की सजा सुनाए जाने के बावजूद राजेश मांझी के चेहरे पर किसी भी तरह की सिकन नहीं थी। उल्टा वह जाते वक्त टिंकू पर ही कई आरोप लगा रहा था। उसे दो बच्चों को मौत के घाट उतारने का कोई गम नहीं है। टिंकू ने बताया कि गांव का होने के बावजूद उसने बिना किसी वजह के मेरे बच्चों को मार दिया। मेरी पत्नी की रातें रात भर रोते हुए कटी हैं। अब जाकर मुझे सकून मिला है। इसे जल्द से जल्द फांसी पर लटका दो। पूरे मामले की हाईकोर्ट तक पैरवी करूंगा।

एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ