खुर्शीद खान
सुल्तानपुर। नदी के किनारे शौंच के लिए गए अधेड़ को पानी में डूबाकर जान से मार डालने के मामले में अपर जिला जज चतुर्थ की अदालत ने पिता-पुत्र समेत तीन को दोषी ठहराया है। सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने सभी आरोपियों को उम्र कैद एवं 60 हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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मामला बल्दीराय थाना क्षेत्र के रामपुर थुआ गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले देवनरायन निषाद ने 31 अक्टूबर 2008 को हुई घटना का जिक्र करते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आरोप है कि एक दिन पहले नन्कऊ निवासी रामपुर थुआ व दूधनाथ एवं उसके बेटे संतोष निषाद निवासीगण हेमनापुर थाना बल्दीराय से उसके परिवार के बीच वाद-विवाद हुआ था। इसी रंजिश को लेकर अभियोगी का बड़ा भाई लक्ष्मीनरायन निषाद जब अपनी नाव से खेत देखने के लिए नदी के दूसरे क्षोर पर गया था ,तो उसी समय शौच के लिए गए होने के दौरान आरोपीगण दूधनाथ, संतोष व नन्कऊ ने उसके भाई को पानी में डुबाकर जान से मार डाला और उसके शव को खींंचकर किनारे की ओर ले जा रहे थे। यह देखकर जब अभियोगी चिल्लाया तो आरोपीगण शव को छोड़कर भाग लिए। इस मामले की विवेचना थानाध्यक्ष अटल बिहारी ने शुरू की। जिनका स्थानांतरण होने पर आगे की तफ्तीश विवेचक एमएम चौहान ने पूरी कर भादवि की धारा 306 में सभी आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अदालत में चार्ज बनने के दौरान शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र मिश्र ने पुलिस की विवेचना पर सवाल खड़ा करते हुए हत्या सहित अन्य धाराओं में आरोप तय किए जाने की मांग की। जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने 306 भादावि के बजाय 302, 34 भादवि की धारा में आरोपियों के विरूद्ध आरोप तय हुआ। मामले के विचारण के दौरान शासकीय अधिवक्ता रमेशचंद्र मिश्र ने सात गवाहों को परिक्षित कराया वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दो गवाहो को पेश किया। उभय पक्षों के साक्ष्यों एवं तर्को को सुनने के
पश्चात सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने सभी आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए उन्हें उम्र कैद एवं 20-20 हजार रूपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदंड की रकम में से आधी रकम मृतक के पत्नी व बच्चों को देने का निर्देश दिया है। जुर्माने की रकम न जमा करने पर अदालत ने दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भी काटने का आदेश दिया। वहीं अदालत ने विवेचना के प्रति लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारियों के विरूद्ध जनरल रूल क्रिमिनल की धारा-53 के अन्तर्गत नियमानुसार कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक को भी आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया है।


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