अमरजीत सिंह
फैजाबाद :जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं, यहां जीवन रक्षक दवाओं का संकट खड़ा हो गया है ,जिला अस्पताल में जीवन रक्षक दवाएं नदारद है, मरीज व तीमारदार पर्ची लेकर जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं आलम या है कि जिले का सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एक्सरे के लिए प्लेट नहीं है जबकि दुर्घटना से जुड़े सभी मामले में घायल मरीज जिला अस्पताल की ही शरण लेते हैं ऐसे में अगर उनकी जांच ही नहीं हो पाएगी तो इलाज कैसे होगा वही बरसात के मौसम में अक्सर डाग और बंदर जैसे जानवरों से इंसान पर हमले की घटनाएं बढ़ जाती है इन जानवरों का मामला और उससे होने वाले घाव में रैबीज का वायरस पनप जाता है, ऐसे में अगर किसी को कुत्ता या बंदर काट ले तो जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन मौजूद नहीं है, हां अगर कुछ मौजूद है तो केवल पैरासिटामाल या कुछ विटामिन की दवाएं यहां सब कुछ रामभरोसे है,
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल कुछ ऐसा है कि जहां आने वाले मरीज और दुर्घटना में घायल लोग यह मानकर चलते हैं कि जिंदगी जितनी है उतनी जिएंगे क्योंकि ना दवाओं का भरोसा और ना डॉक्टरों का कमरे के दरवाजे पर बोर्ड लगा है यहां लिखा है रैबीज से बचाव का इंजेक्शन नहीं है दर्जनों मरीज इन्हें डाग या बंदर ने काट रखा है लगातार अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है दवा बांटने वाली खिड़की पर मरीजों और उनके तीमारदारों तो दिखेंगे लेकिन जरूरत की दवाएं मौजूद नहीं है दवाएं हैं भी तो जर्नल दवाएं जो सर्दी जुखाम और बुखार की होती है, अगर आप कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो इसकी दवा जिला अस्पताल में मौजूद नहीं है और ना ही यहां के सीएमएस स्थानीय स्तर पर इन दवाओं को खरीद रहे हैं एक्सरे कराने के लिए मरीजों की लाइन लगी है लेकिन एक्स-रे प्लेट है ही नहीं जब अस्पताल में एक्सरे प्लेट नहीं है तो मरीजों का एक्सरे होगा कैसे जब आवश्यक दवाओं के अभाव में जब जिला अस्पताल खुद बीमार हो गया हो तो वह लोगों की बीमारी कैसे दूर करेगा,


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