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प्रतापगढ़:आम आवाम मे प्रमोद तिवारी के रसूख व मोना के करिश्मे की छायी चर्चा


अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर अभी भी लालगंज मे सियासत गर्म

लालगंज / प्रतापगढ़। स्थानीय लालगंज क्षेत्र पंचायत प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के दूसरे दिन गुरूवार को भी सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म दिखा। तहसील मुख्यालय हो या फिर बाजारों मे चाय पान की दुकानों तक पर लोग प्रमुख पद पर अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के तरह तरह के कारणों को गिनाते देखे सुने गये। हालांकि लगभग लोगों की जुबान पर भाजपाई ब्लाक प्रमुख के चित होने को लेकर कांगे्रस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी का रसूख और उनकी विधायक बेटी आराधना मिश्रा मोना के प्रबन्धन के करिश्में को ही आंका जा रहा है। वहीं लोगों की बहस इस बात पर भी टिकी नजर आयी कि प्रमोद तिवारी का सियासी कद ही क्या कुछ ऐसा कारण बन गया कि सत्तारूढ़ दल ने अपने ही दल के ब्लाक प्रमुख की कुर्सी बचाने के लिये जो शुरूआती तेजी दिखाई थी आखिर वह ऐन वक्त पर खामोशी मे क्ंयू बदल गयी। तहसील मे अधिवक्ताओं मे तो चर्चा इस बात की रही कि दरअसल सियासत के माहिर खिलाड़ी प्रमोद तिवारी ने प्रशासन और शासन से लेकर हाईकोर्ट मे अविश्वास लाने वाले बीडीसी सदस्य से याचिका दाखिल कराकर प्रमुख की कुर्सी को दरकिनार करने के लिये सत्तारूढ़ दल ने ज्यादा उछलकूद जरूरी नहीं समझा। लोगों की मानें तो रामपुर खास मे तो प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा मोना का दबदबा तो है ही लेकिन पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र विश्वनाथगंज के गारापुर न्याय पंचायत मे भी तो प्रमोद तिवारी का ही सिक्का इस बार चल उठा दिखा। जबकि विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की सहयोगी अद से विधायक चुने गये है। यही नहीं जिले से भाजपा के ही सहयोगी दल का सांसद होने के बावजूद रामपुरखास तो दूर विश्वनाथगंज की एक बड़ी न्याय पंचायत गारापुर मे भी भाजपाई प्रमुख को कोई जीवनदान आखिर क्ंयू नही मिल सका। वहीं लोगों की जुबान पर यह भी चर्चा खूब तैरती दिखी कि दरअसल जिस तरह हाईकोर्ट ने बीस तारीख को ही जिला प्रशासन को लालगंज प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई कराने के लिये तल्ख निर्देश दे रखे थे ऐसे मे सरकार या शासन प्रशासन कोर्ट से खुद अपने लिये कोई फजीहत मोल लेने का रिस्क उठाने से परहेज मे दिखी। रामपुरखास लगभग चार दशक से कांग्रेस या सच तो यह है कि प्रमोद तिवारी का अजेय और अभेदय गढ़ माना जाता है। बीते प्रमुख के चुनाव मे पार्टी संगठन स्तर पर अपनी अंदरूनी कलह को शायद नहीं संभाल पायी और प्रमोद तिवारी ने भी प्रमुख के चुनाव मे संगठन पर ही भरोसा कर रखा था। शायद इसीलिये कांग्रेस के हाथ से लालगंज ब्लाक की कमान फिसल गयी और प्रमोद तिवारी तथा विधायक आराधना मिश्रा मोना के लिये वह नतीजा चैकानें वाला सामने आया। वैसे भी प्रमोद तिवारी पंचायत चुनावो मे दिलचस्पी नहीं लिया करते किंतु ब्लाक प्रमुख के चुनाव मे विरोधी गुट का कब्जा उन्हें अखरा और इसीलिए इस बार के अविश्वास प्रस्ताव की कमान उन्होेनें अपनी निगरानी मे क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा के हाथों सीधे सौंप रखी थी। अविश्वास प्रस्ताव के ठीक एक दिन पहले विधानसभा चुनाव मे लालगंज ब्लाक मे संगठन का प्रभार संभाल चुके विधायक मोना के पति अंबिका मिश्र और प्रमोद तिवारी की छोटी बेटी विजयश्री सोना भी लालगंज कैम्प कार्यालय आ डटे तथा संगठन स्तर पर तैयारियों की देखरेख पर अपनी नजर लगाये रखी। नतीजा विधायक आराधना मिश्रा मोना के खुद कमान संभालने से भाजपाई ब्लाक प्रमुख को पैदल होना पड़ा तथा कांग्रेस खेमे को सफलता से प्रमोद तिवारी का बढ़ा सियासी कद और बढ़ गया लोगों को दिखने लगा...........।

सफलता पर कांग्रेसियों में जश्न, विरोधी खेमे मे सन्नाटा

  प्रमुख पद पर अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के दूसरे दिन भी कांग्रेसी खेमे मे जश्न का माहौल चढ़ा नजर आया तो दूसरी ओर शक्ति परीक्षण मे हार की चोट से दूसरा खेमा गमजदा दिखा। कांग्रेसियों का जमावड़ा दिनभर स्थानीय विधायक आराधना मिश्रा मोना के कैम्प कार्यालय पर दिखा और लोग अविश्वास प्रस्ताव मे सफलता को लेकर अपने नेतृत्व प्रमोद तिवारी तथा आराधना मिश्रा मोना की सधी चालों का लोहा मानते सफलताओं की चर्चा मे मशगूल दिखे। दूसरी ओर प्रमुख पद से हटे रमेश प्रताप सिंह के खेमे मे सन्नाटा पसरा दिखा। भाजपाई भी अविश्वास प्रस्ताव के परिणाम को देखकर खामोशी मे ही अंदर की चोट का आंकलन करते जरूर देखे गये।

देवराज इन्द्र को भी प्रमोद की सफलता का सेहरा...

प्रमुख पद पर अविश्वास प्रस्ताव पारित होने की सफलता को लेकर लोगो खासकर कांग्रेसियों के बीच ऊपरवाले की मेहरबानी की भी चर्चा का सियासी चटकारा देखने को मिला। कांग्रेसियों के मुताबिक बुधवार की सुबह से ही बारिश की शुरूआत उनके सफलता के लिये शुभ लक्षण का ऐहसास करा गयी। सुबह की बारिश और शाम तक ही नहीं बल्कि दूसरे दिन गुरूवार को भी सुबह तक जारी रहने से लोगों का कहना रहा कि प्रमोद तिवारी के बाबा धाम मे मत्था टेकने के बाद से ही शायद देवराज इन्द्र भी प्रमोद तिवारी को इस बार की सफलता का एहसास कराते रहे। प्रमोद तिवारी के क्षेत्र मे बने होने के बाद से बारिश की फुहांरे सियासी मौसम मे भी चर्चा का विषय बनी देखी जा रही है। जो भी सफलता तो कांग्रेस के हाथ लग ही गयी और अब ऊपरवाले की मेहरबानी को कांग्रेसी आखिर क्ंयू सजदा न करें। कांग्रेसियों मे पितृपक्ष मे अविश्वास प्रस्ताव को विसर्जन के मुहूर्त की सफलता तो नवरात्र के पहले दिन ट्रांसफार्मर मरम्मत के कार्य के शुभारम्भ को स्थापना की सफलता भी खास चर्चा का बिन्दु रही।

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