खुर्शीद खान
सुल्तानपुर वन विभाग अपनी भूमि की सुरक्षा करने के बजाए गैर वन भूमि पर भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए अति पिछड़ां के आवास व व्यवसाय में लगा रहा है अड़ंगा।मोस्ट कल्याण संस्थान के निदेशक व शिक्षक नेता श्यामलाल निषाद ने बाधमंडी निर्माण में उत्पन्न हुए अवरोध को समाप्त किये जाने तथा वन विभाग व भू माफियाओं की मिलीभगत की उच्चस्तरीय जांच कराये जाने के सम्बन्ध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने बयान में कहा कि ग्राम सभा कस्बा सुल्तानपुर (पांचोपीरन) की वन विभाग की भूमि से सम्बंधित समस्त भू-अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट है कि जिस गाटा संख्या 932 में बाधमण्डी का निर्माण हो रहा है वन विभाग की भूमि नही है, क्योंकि वन भूमि से सम्बंधित 1955 ई. के गजट नोटिफिकेशन में गाटा संख्या 932 का कहीं उल्लेख नही है, फसली आधार वर्ष 1402-1407 तक गाटा संख्या 932 वन विभाग में दर्ज नही है, चकबन्दी खतौनी में गाटा संख्या 932 ऊसर श्रेणी नवीन परती दर्ज है, चकबन्दी अभिलेख 2ए की नकल में गाटा संख्या 932 वन भूमि होने का कोई प्रमाण नही है, चकबन्दी के अभिलेख आकार 23 भी दिनाँक 21 जनवरी, 2008 में गाटा संख्या 932 वन भूमि में कहीं दर्ज नही है।श्री निषाद ने कहा कि गाटा संख्या 932 ग्रामसभा कस्बा के नाम रकबा 1.316, खाता संख्या 426 पर दर्ज है, उक्त रकबा ग्राम सभा कस्बा के प्रस्ताव द्वारा बाधमण्डी बनाने हेतु दिया गया तथा बाधमण्डी निर्माण सम्बन्धी समस्त भू-अभिलेखीय औपचारिकताएं पूरी होने के पश्चात (बाधमण्डी कस्बा पांचोपीरन से सम्बंधित भू-अभिलेख, फाइल संख्या 476/16 जो कि विनियमित क्षेत्र सदर एसडीएम की अदालत में उपलब्ध है) शासन की मंशा के अनुरूप 12 सितंबर 2016 को तत्कालीन जिलाधिकारी एस.राजलिंगम के कर-कमलों द्वारा विधि-विधान से शिलान्यास किया गया तथा लगभग 70 प्रतिशत बाधमण्डी निर्माण हो जाने के पश्चात क्षेत्रीय वनाधिकारी ने 21 जून 2017 को कार्यदायी संस्था ग्राम्य विकास अभिकरण एवं अधिशाषी अभियन्ता, यूपी सिडको को बाधमण्डी निर्माण कार्य बन्द करने का अवैधानिक आदेश पारित किया, तब से बाधमण्डी निर्माण कार्य रुका हुआ है।श्यामलाल निषाद ने वन विभाग पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माणाधीन बाधमण्डी के आसपास गाटा संख्या 897, 1015 (लगभग 28 बीघा) वन विभाग की भूमि है, किन्तु उक्त सम्पूर्ण भूमि का भू-माफियाओं द्वारा अवैध बैनामा व अवैध कब्जा वन विभाग के अधिकारियों की जानकारी में हुआ है लेकिन वनाधिकारी भूमाफियाओं से गिरोहबन्द होने के कारण उनके खिलाफ समुचित विधिक कार्यवाही करने के बजाय भू-माफियाओं के इशारे पर बेहद पिछड़े परिवारों की रोजी-रोटी से जुड़े बाध व्यवसाय को स्थायित्व प्रदान करने के उद्देश्य से निर्माणाधीन बाधमण्डी की भूमि को भी (जो कि वन भूमि नही है) बाधमण्डी निर्माण कार्य अवरुद्ध कराकर भूमि को भू-माफियाओं के हवाले कर देना चाहते है। वनाधिकारियों के उक्त कार्य-व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि व्यक्तिगत लाभ के चक्कर में वनाधिकारी भू-माफियाओं के इशारे पर कार्य कर रहे है। शिक्षक नेता श्री निषाद ने कि शहर के आस-पास मछली मंडी या मछली की दुकान या स्थान आरक्षित न होने के कारण मछली बेचने वालों को आये दिन प्रशासन ठेलता-खदेड़ता रहता है जिस कारण अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है, जबकि गाटा संख्या 932 में निर्माणाधीन बाधमण्डी के ठीक सामने पश्चिम दिशा में (फैजाबाद-इलाहाबाद रोड के बगल) गाटा संख्या 558 रकबा 0.772 ग्रामसभा कस्बा के बंजर खाते में दर्ज है, जिस भूमि पर मछली मण्डी या मछली बेचने की दुकान के लिए अतिशीघ्र आरक्षित करा लेना सर्वथा उपयुक्त होगा अन्यथा वनाधिकारी उक्त बंजर जमीन को भी भू-माफियाओं के हवाले से महंगी कीमत पर फर्जी बैनामा करा देने से गुरेज नही करेंगे। श्री निषाद ने प्रेस के माध्यम से शासन-प्रशासन से मॉंग की कि गाटा संख्या 932 में हो रहे बाधमण्डी निर्माण अवरोध को अविलम्ब समाप्त कराने, वनाधिकारियो की अवैधानिक कार्यों में संलिप्तता तथा भू-माफियाओं से साठ-गाँठ की उच्च स्तरीय जाँच, मछली मण्डी हेतु गाटा संख्या 558 को आरक्षित कराया जाय ताकि बेहद गरीब परिवारों से जुड़े व्यवसाय को स्थायित्व तथा शहर की यातायात व्यवस्था सुगम हो सके।

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