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सुलतानपुर:छात्रा को ब्लैकमेल करने के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज


खुर्शीद खान 
सुलतानपुर। बीएससी छात्रा को ब्लैकमेल कर धनउगाही करने एवं उसके अपहरण के मामले में आरोपी छात्र की तरफ से एडीजे चतुर्थ की अदालत में जमानत अर्जी पेश की गयी। जिस पर सुनवाई के पश्चात सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने बरामद हुए पत्र, छात्रा की बरामदगी अब तक न होने एवं आरोपी के जरिए समाज की बहुमूल्य धरोहर प्रेम एवं विश्वास जैसे भावना को ठेस पहुचाने का तथ्य दर्शाते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।  
आगे पढ़ें पूरा मामला
मामला कोतवाली नगर क्षेत्र के केएनआई विद्यालय से जुड़ा है। जहां पर बीएससी की पढ़ाई कर रही छात्रा निवेदिता सिंह बीते 23 अगस्त को सदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गयी। जिसके सम्बंध में पहले गोलाघाट पुल से गोमती नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या की बात सामने आयी। निवेदिता की लाश बरामदगी को लेकर पुलिस ने गोताखोरों को लगाया, लेकिन शव की बरामदगी नही हो सकी। वहीं दूसरी तरफ इस घटना के सम्बंध में निवेदिता के पिता राजेन्द्र बहादुर सिंह निवासी कल्लू का पुरवा-मिल एरिया जिला रायबरेली ने कोतवाली मे मुकदमा दर्ज कराया। उनके आरोप के मुताबिक सिंह हास्टल में निवेदिता के साथ रह रही रूम पार्टनर रागिनी राय ने बताया कि उसकी मोबाइल पर गुरूकुल हास्टल में रह रहे बीएससी तृतीय वर्ष के ही छात्र गौरव सिंह का 23 अगस्त की रात में करीब साढ़े तीन बजे फोन किया। जिससे बात करते हुए निवेदिता कमरे से बाहर निकली। इसी के बाद से ही निवेदिता का कुछ पता ही नही चला। सुबह होने पर निवेदिता का चप्पल व रागिनी का मोबाइल गोलाघाट पुल के पास से बरामद हुआ। आरोप के मुताबिक गौरव सिंह अक्सर निवेदिता को परेशान करता था और ब्लैकमेेल कर धनउगाही भी करता था। मिली जानकारी के मुताबिक गौरव  सिंह के खाते में निवेदिता पहले रूपए भी भेज चुकी है। इसी मामले में निवेदिता के पिता के आरोप के आधार पर पुलिस ने गौरव को जेल भेजने की कार्यवाही की। जिसकी तरफ से एडीजे चतुर्थ की अदालत में जमानत अर्जी पेश की गयी। जिस पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने समाचार पत्रों में प्रकाशित आत्महत्या की खबरों को आधार बनातेे हुए गौरव को निर्दोष बताया और जमानत स्वीकार करने की मांग की। वहीं शासकीय अधिवक्ता रमेश चंद्र ने निवेदिता के जरिए भगवान के नाम लिखे गए बरामद पत्र में दर्शायी गयी उसके दर्द की दास्तां, शव का पता अब तक न लगने समेत अन्य बातों को आधार बनाते हुए जमानत पर विरोध जताया। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने अपने आदेश में बरामद पत्र के मुताबिक गौरव की वजह से निवेदिता के पास मरने के अलावा और कोई विकल्प न रहने की बात, अब तक शव की बरामदगी न होने एवं प्रेेम व विश्वास जैसे पवित्र भावना को गहरा आघात पहुंचाने के चलते जमानत का आधार न पर्याप्त पाते हुए अर्जी खारिज कर दी।

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