लालगंज / प्रतापगढ़। लालगंज ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने को लेकर अब पंचायत प्रतिनिधियों मे कांग्रेस के दिग्गज प्रमोद तिवारी तथा रामपुरखास की विधायक आराधना मिश्रा मोना की नुमाइन्दगी के प्रति भरोसा और मजबूत हो उठा दिखने लगा है। बीते बुधवार को पैदल हुये भाजपाई प्रमुख के खेमे से सत्ता तथा प्रशासन का भय और दबाव बनाने के बावजूद प्रमुख के खिलाफ बीडीसी सदस्यों ने निर्भीक होकर मतदान किया तो इसके पीछे प्रमोद तिवारी का मतदान मे बीडीसी सदस्यों को सुरक्षा का मजबूत भरोसा दिला रखना अहम कारण बनकर उभरा है। डीएम के समक्ष जिस दिन से बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव खुद पेश किया था। उसी दिन से सदस्यों को इस पर कार्रवाई को लेकर तरह तरह के प्रशासनिक रोड़े को लेकर संशय मन ही मन बना हुआ भी दिख रहा था। यह संशय तब और बढ़ गया जब भाजपाई प्रमुख खेमे को लेकर जिले के अपना दल सांसद हरिवंश सिंह भी डीएम कार्यालय भाजपाई प्रमुख के साथ विश्वास को लेकर अगुवाई करने खुद पहंुच गये। अब अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले बीडीसी सदस्यों के सामने सांसद प्रमोद तिवारी का कददावर नेतृत्व ही विकल्प के तौर पर सामने नजर आ सका। हालांकि अपने निर्वाचन क्षेत्र मे बीजेपी समर्थित प्रमुख के द्वारा गांवों मे छोटे मोटे विकास कार्यो मे भी प्रस्तावों पर बाधा को लेकर प्रधानों व बीडीसी सदस्यों की बढ़ी शिकायतों से क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना भी ब्लाक मे अवरोध को नापसंद कर रही थी। जब लालगंज ब्लाक के अधिकांश बीडीसी सदस्यों ने क्षेत्रीय दौरे पर आयीं विधायक मोना से मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने की उन्हें जानकारी देते हुये सहयोग व समर्थन की अपील की तो विधायक मोना ने भी सदस्यों को स्वतंत्र वातावरण मे कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद सांसद प्रमोद तिवारी के भी लालगंज दौरे के दौरान बीडीसी सदस्यों का जत्था उनके कैम्प कार्यालय पहंुच गया और प्रमुख खेमे से मिल रही तमाम धमकियों तथा प्रशासनिक उत्पीड़न के अंदेशे की पीड़ा बंया की गयी। इस पर सांसद प्रमोद तिवारी ने बीडीसी सदस्यों को यह विश्वास जरूर दिलाया कि जिस अविश्वास प्रस्ताव को सदस्यों का बहुमत लेकर आया है उसमे अडंगा प्रशासन या सरकार की तरफ से कतई नहीं होने पायेगा। प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा मोना के मिले सुरक्षा के आश्वासन के बाद से ही बीडीसी सदस्यों का मनोबल बढ़ गया। तत्कालीन डीएम के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को परीक्षण कमेटी मे भेजने तथा कई दिन बाद तिथि का ऐलान होने से प्रमोद तिवारी ने इस तारीख के आगे बढ़ने का अंदेशा शायद भांप लिया था। इसी बीच अविश्वास प्रस्ताव की तारीख को सुनिश्चित कराने को लेकर हाईकोर्ट मे याचिका भी दाखिल हो गयी। हाईकोर्ट मे याचिका दाखिल होने व वहां से बेंच के कडक निर्देश से बीडीसी सदस्यों को प्रमोद तिवारी पर विश्वास और बढ़ गया। नतीजा सरकार और सत्ता तथा इससे जुड़े लोगों ने भी चुप्पी साध ली और प्रशासन भी इधर बेंच और उधर सियासत के दिग्गज प्रमोद तिवारी से पंगा लेना मुनासिब नहीं समझा। जो भी हो अब तो ब्लाक प्रमुख के चुनाव की तिथि के ऐलान की कमान निर्वाचन आयोग के हाथों जा पहुंची है लेकिन अविश्वास पारित होने के दूसरे दिन गुरूवार तथा तीसरे दिन शुक्रवार को भी लालगंज स्थित विधायक मोना के कैम्प कार्यालय पर प्रधानों तथा क्षेत्र पंचायत सदस्यों का जमावड़ा जिस तरह देखा जा रहा है और इनकी चर्चाओं मे अब प्रमोद तिवारी तथा मोना मिश्रा के सहयोग से अपने अपने क्षेत्र मे पंचायत के द्वारा रूके विकास कार्य के पटरी पर आने की उम्मीद बढ़ी है। यहीं नही इन सदस्यों को यह भी एहसास हो रहा है कि विकास के लिये प्रमोद तिवारी का जो नाम जिले भर मे जाना जाता है उसके तहत अब उनके क्षेत्रों मे कुछ न कुछ विकास का दीपक रोशन हो सकेगा। उधर जनचर्चा मे शुक्रवार को भी यह साफ दिखा कि रामपुरखास मे दिग्गज प्रमोद तिवारी और उनकी विधायक बेटी आराधना मिश्रा मोना की किलेबंदी सधी चालों मे तोड़ पाना इस बार बहुतों के लिये नामुमकिन साबित हुआ और वहीं भाजपा समर्थित प्रमुख का उन्नीस महीने मे ही पैदल हो जाना बीते विधानसभा चुनाव मे प्रमोद तिवारी से सियासी पंगा मंहगा साबित होना खूब चटखारे मे है। यहीं नहीं लोगों के बीच यह भी चर्चाए आम है कि प्रमोद तिवारी का सरकार से बाहर होने के बावजूद दिल्ली और लखनऊ मजबूत सियासी रसूख भी सत्ता पक्ष को उलझा कर रख दिया है।


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