राकेश गिरी
बस्ती :कहने को तो कुष्ट आश्रम मगर मरीज महज सिर्फ एक और इनके लिए सरकारी जमीन 35 एकड। इसकी पोल खुली डीएम के निरीक्षण में।बस्ती शहर के उत्तरी क्षोर स्थित हथियागढ़ गांव में 22 मई 1961 को यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चन्द्रभान जी गुप्त द्वारा इस आश्रम के उद्घाटन किया था तब से कुष्ट रोगियो के लिये आश्रम का संचालन हो रहा है मगर डीएम अरविंद सिंह को जब पता चला कि आश्रम संचालक ने कई एकड जमीन कब्जा कर लिया है जिसकी आश्रम के हिसाब से जरुरत भी नही है तो उन्होने जमीन को खाली कराने के लिये प्रक्रिया शुरु करा दी है जिसके बाद आश्रम संचालक की हवाईयां उड गई है और उसके फर्जीवाडे की पोल खुल गई है। जिलाधिकारी ने जिले में प्रशिक्षण पर आए आईएएस अधिकारी ज्वांइट मजिस्ट्रेट चंद्र मोहन गर्ग कोे जब कुष्ठ सेवाश्रम हथियागढ़ का औचक निरीक्षण कर जांच करने का आदेश दिया तो वहां सब कुछ गड़बड़ मिला। मौके पर कुष्ठ आश्रम में कोई कर्मचारी नहीं मिला। इतने बड़े सेवा संस्थान में महज एक कुष्ठ रोगी मिला। पुराने जर्जर भवन में बैठा एकमात्र कुष्ठ रोगी ही नजर आया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मौके पर मौजूद मंगरु जिला देवरिया ने बताया कहा कि वह लंबे समय से कुष्ठ सेवाश्रम में रह रहा है। बताया कि पहले इस सेवाश्रम में 30 से 35 कुष्ठ रोगी रहते थे। समय के साथ उनकी संख्या कम होती गई। बताया कि पहले खाना बनाने के लिए भंडारी रहता था, अब कोई नहीं है। कुछ कुष्ठ रोगी अपने घर चले गए। वे केवल स्वास्थ्य कैंप में दवा लेने आते है। बताया कि पिछले पांच वर्ष से यहां कोई कुष्ठ रोगी नहीं आया। यहां कोई सुविधा ही नहीं है। पूछताछ के दौरान यह भी बताया कुष्ठ सेवाश्रम के पास 35 एकड़ जमीन है। जबकि कागजों में 10 कर्मचारी तैनात है लेकिन कागजों में।
अब कुष्ठ सेवाश्रम की बेशकीमती संपत्ति की खोजबीन शुरू हो गई है। इस समिति के सभापति जिलाधिकारी है। पहली बार प्रशासन ने इस संस्था की मजबूती के लिए पहल की है। जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। संयुक्त मजिस्ट्रेट आइएएस चंद्र मोहन गर्ग इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं। समिति में दो अन्य सदस्य भी नामित किए गए है। जांच समिति ने संस्था का गठन कब हुआ कितनी संपत्तियां उस समय रहीं। वर्तमान मे इसका स्वरूप क्या है। सेवाश्रम से जुड़े सदस्य सचिव और सदस्यों की क्या भूमिका है।संस्था की मजबूती और कुष्ठरोगियों के सहायतार्थ क्या प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जांच समिति सेवाश्रम के आय व्यय का पूरा अध्ययन करेगी और इसकी रिपोर्ट अगले सात दिन में जिलाधिकारी को सौंपेगी। जिलाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने बताया कुष्ठ सेवाश्रम के बारे में लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए जांच समिति बनाई गई है। इससे जुड़े डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की कोई भूमिका नहीं होनी बताई गई। कुष्ठ रोगियों को आश्रम देने के लिए ही इसकी स्थापना की गई। यहां पर इसकी भूमिका बढ़ाने के उपायों पर विचार किया जा रहा है। बहरहाल जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।


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