नाव के सहारे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर सैकड़ों लोग करते है नदी पार
(शिवेश शुक्ल / मनीष ओझा )
प्रतापगढ़। विकास करने को लेकर शासन की ओर से जितने भी दावे किए जा रहे है,इन दावों की हकीकत बेल्हा में दम तोड़ती नजर आ रही है। जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर सई नदी के किनारे बना करौंदी घाट एक शताब्दी बीतने के बाद भी एक अदद पुल के लिए तरस रहा है। इस घाट से जुड़े ईशीपुर, गडई चकदेइया, पूरेमाधोसिह, बेलहनी, रामनगर करौदी समेत दर्जनभर से अधिक गांव के लोग मात्र एक नाव के सहारे आ-जा रहे है। चाहे लोगों को बाजार जाना हो या बच्चों को स्कूल जाना हो,सभी जान जोखिम में डालकर नाव की सवारी करने को मजबूर है। दूसरी ओर जिले के नेताओं के साथ ही अफसर भी इस बात को बखूबी जानते है फिर भी घाट पर पुल बनाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है । इतना ही नही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के दौरान कई नेताओं ने इस घाट पर पुल निर्माण कराने का वादा भी कर चुके है किन्तु चुनाव में विजयश्री पाने के बाद उक्त समस्या की ओर मुडकर देखना मुनासिब नही समझा ।समस्या को लेकर नेताओ द्वारा किए वादे खिलाफी से क्षेत्रीय लोगो में भीतर भीतर आक्रोश है ।जो आने वाले चुनाव में अपने मताधिकार कर बयॉ करने की मंशा पाल रखे है ।
वीडियो : जान जोखिम में डाल कर स्कूल जाते है मासूम
हर चुनाव में छले जाते है हजारों वोटर
जब भी चुनाव आता है तो वोट मांगने के लिए जो भी नेता करौंदी घाट के आस पास के गांवों में पहुँचते है इनसे ग्रामीण बस करौंदी घाट पर पुल बनाने की बात रखते है।इस दौरान नेता वादा तो करते है लेकिन चुनाव बीतने के बाद अपने वादों को भूल जाते है। नेताओं की वादा खिलाफी से इस घाट की समस्या जस की तस बनी है । और दर्जन भर गॉव के लोग जान जोखिम मे डाल कर नदी पार कर रहे है ।
वीडियो :नाविक की जुबानी
नाविक चन्द्रदेव संभाल रहा है पुस्तैनी काम
विकास खण्ड सदर क्षेत्र के करौंदी घाट से एक परिवार का रिश्ता एक शताब्दी से चला आ रहा है। घाट पर वर्तमान में काम कर रहे एकमात्र नाविक चंद्रदेव सिंह के पूर्वज भी नाविक थे।अपने पूर्वजों का काम आगे बढ़ाने वाले चन्द्रदेव सिंह ने बताया कि घाट पर पल नहीं बन रहा है इससे करीब पच्चीस गांव के लोग प्रभावित है। चन्द्रदेव ने बताया कि उसे जो पैसा दे देते है वह ले लेते है और जो नहीं देता है उसे वह समाजसेवा समझ लेते है।
कई बार डूबी नाव,ईश्वर ने दिया साथ,बच गई सबकी जान
नाविक चन्द्रदेव सिंह ने बताया कि कई बार उसकी नाव किनारे तक नहीं पहुंच पाई। बीच में ही नाव डूब गई। इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई,इसमें चन्द्रदेव का मानना है नदी के किनारे बना शंकर भगवान का मंदिर जहाँ वह पूजा पाठ करता है इसी की देन है कि नाव डूबने के बाद भी कोई हताहत नहीं हुआ।
बांस-बल्ली से हो रहा है पुल का निर्माण
बांस-बल्ली के सहारे पुल बना रहे है ग्रामीण
विकास खण्ड सदर के करौदी घाट पर सरकारी तंत्र से पुल बनने की आस छोड़ चुके ग्रामीण अब बाँस व बल्ली के सहारे तिनका-तिनका जोड़कर पुल बनाने का काम कर रहे है। लेकिन बेहतर तकनीक न होने के कारण पुल बनाने में ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है फिर भी जोश व उमंग होने से ग्रामीण पुल बनाने का प्रयास कर रहे है।जो बास व बल्ली के सहारे बनाकर तैयार करते है और उसपर से दर्जनो गॉव के लोग आवागमन कर रहे है ।किन्तु विकराल समस्या तब आती है जब नदी में बाढ आ जाती है एेसी स्थित मे बास बल्ली टिक नही पाती और बास का पुल धाराशाई हो जाता है, तो फिर वही नाव ही एक सहारा बनता है ।आखिर बडे बडे चुनावी वादे करने वाले नेता कब इस समस्या पर ध्यान देकर समाधान का प्रयास कराने का पहल करेगें ।यह तो भविष्य के गर्त में है ।


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