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फैजाबाद:तहसील कर्मियों के मिलीभगत से भू माफियाओं की चाँदी


अमरजीत सिंह 
फैजाबाद:सोहावल तहसील कर्मी की मिली भगत से सरकारी जमीनों पर भू माफियाओं का अतिक्रमण  क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए समस्या तथा राजस्व कर्मियों भू माफियाओं के लिए मोटी कमाई का जरिया बना हुआ है ऐसा ही मामला हाजीपुर बरसेंडी के बसहा गांव के प्राथमिक विद्यालय और मुस्तफा बाद के बडागांव के खेल के मैदान मे अतिक्रमण किए जाने की शिकायत तहसील दिवस पर किए जाने पर  देखने को मिली ।शिकायत कर्ता शिव कुमार सोनी का
       आरोप है कि खेल के मैदान को कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है जिससे गांव का युवा वर्ग खेल से बंचित है। एसडीएम ने मामले पर जांच के आदेश दे दिए हैं गांव सभा मुस्तफाबाद ( बडागांव बाजार ) की उत्तरी ओर प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय के पास की गाटा संख्या 558 रकबा 0 .1420 हेक्टेयर खतौनी में खेल मैदान के नाम दर्ज है। इसी जमीन से सटी प्राथमिक विद्यालय की भी जमीन है जिसका रकबा करीब एक एकड़ बताया जा रहा है। जिस पर बडागांव, सहजौरा और कैथानी गांव के युवा और बच्चे तरह तरह के खेल खेला करते थे। चूंकि यह भूमि मुख्य मार्ग से सटी हुई है जिस पर कुछ बर्ष पहले भू माफियाओं की नजर लग गई थी और इस जमीन को बेच दिया था। जिससे धीरे धीरे खेलने वाले युवाओं को वहां से खदेड़ा जाने लगा
        बताया जाता है कि भूमि पर अबैध कब्जे के बारे में पहले भी शिकायत हुई थी लेकिन उस समय भी भू माफिया हाबी रहे और कब्जा हटाने नहीं दिए ऐसा ही  मामला पंचायत भवन और तालाब की जमीन को लेकर भी है चर्चा है कि इस जमीन को भी कई खण्डों में बेच दिया गया है जिसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है वहीं अतिक्रमण को लेकर प्रसाशन का रवैया भी ढुलमुल दिखाई  दे रहा है
         मंगलवार को तहसील दिवस में मुस्तफाबाद निवासी शिव कुमार सोनी ने खेल मैदान को लेकर शिकायत दर्ज कराई है जिसमें आरोप है कि इस जमीन पर कुछ दबंग लोगों ने कब्जा कर लिया है जिससे गांव के युवा खेल से बंचित हैं। और इसे खाली कराकर खेल योग्य कराने की गुहार लगाई गई है भाजपा नेता मालिकराम रावत का कहना है कि शिकायत के बाद मामले की लेखपाल जांच करते हैं और दोषियों को बचाने का भरपूर प्रयास कर मोटी रकम लेकर लीपा पोती कर रिपोर्ट तैयार कर खानापूर्ति कर दी जाती है उस पर राजस्व निरीक्षक नायब तहसीलदार तहसीलदार उपजिलाधिकारी सभी बिना जांच किए ही कार्यालय मे बैठे बैठे ही फाईलो पर सहमति देते हुये  अपने नाम की चिडिया बिठा कर सहमति दर्ज कर फाईलो को ठंडे बस्ते मे डालने का काम कर देते हैं ऐसे में पीडित शिकायत को  न्याय मिल पाना दूर कौड़ी साबित हो जाती है और पीडित न्याय के लिए अप्लीकेशन लेकर दफ्तर के अधिकारियों के चक्कर काटता रहता है बावजूद इसके न्याय नहीं मिल पाता और थकहार कर घर मे बैठ जाने पर विवश हो जाता है और राजस्व कर्मी भू माफिया मोटी कमाई कर मालामाल होते हैं

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