गोण्डा। मुख्यालय से सटे कहे या नगर परिषद के वार्डों के बीच बसे मोहल्ले आजादी के 70 वर्ष बाद भी सुख सुविधाओं से दूर है।
मण्डल मुख्यालय पर स्थित नगर सीमा के अन्दर व सटे हुए मोहल्ले अभी ग्राम सभा है जबकि अगल बगल आगे पीछे के मोहल्ले नगर परिषद में शामिल है। मुख्यालय का रानीजोत, सेमरा, खैराबाग, कुम्भ नगर, खैरा नई बस्ती, छेदी पुरवा, इमलिया गुरुदयाल, गोण्डा गिर्द, गरीबी पुरवा, रानी पुरवा, जानकी नगर सहित दर्जनों गांव ऐसे है जो ग्राम सभा होने के बावजूद यहाँ शहरी विद्युत की सुविधा भी है लेकिन अन्य विकास कार्य ग्रामीण स्तर से ऊँट के मुंह में जीरे के समान हो रहा है। मुख्यालय पर स्थित कोतवाली देहात नगर परिषद में है लेकिन यदि अगल बगल व कोतवाली के सामने ही कोई घटना हो जाये तो मुकदमा नगर कोतवाली में दर्ज होगा। जबकि देहात कोतवाली का सीमा कोतवाली से 5 किमी दूर से शुरू होता है।
मुख्यालय के बस स्टाप से सटे जानकी नगर की स्थित तो बद से बदतर बनी हुयी है।
मोहल्ले के निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीचन्द श्रीवास्तव का कहना है कि जानकी नगर किसी भी स्तर से ग्राम सभा नही लगता कालोनी जैसा बसा हुआ दर्जनों मोहल्ले है। सभी मोहल्लों में सड़के है। नाली नाले के लिए स्थान है लेकिन ग्राम सभा में बजट ऊँट के मुंह में जीरे के समान है जिससे विकास नही हो पा रहा है। सड़के गड्ढे में तब्दील है। नाली नाले का गन्दा पानी खाली पड़े भूमि पर एकत्रित होकर पूरे मोहल्ले में संक्रामक रोगों के फैलने का दावत दे रहा है। जिससे लोग नरकीय जिन्दगी को जीने के लिए मजबूर है। अधिवक्ता श्रीचन्द ने बताया कि मोहल्ले में जागरुक और पढ़़े लिखे लोग रह रहें है। कई बार पंचायत राज अधिकारी से शिकायत की गयी लेकिन गन्दे पानी के बहाव की कोई व्यवस्था नही की जा रही है। 


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