Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

कौशाम्बी :80 साल पुराना अजुहा बाजार खोता जा रहा है अपनी पहचान


सत्येन्द्र खरे 
कौशाम्बी :80 साल पुराने अजुहा बाजार की दशकों पहले देश के कई राज्यों में अपनी पहचान थी। गुड़ व गल्ला मंडी के नाम से यहां की मंडी विख्यात थी। पहले आवागमन सुलभ था। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और बाजार गलियों में सिमट कर रह गया। सरकारें बदलीं, निजाम बदला, लेकिन यहां की सूरत नहीं बदल सकी। पांच साल पहले किए गए ढेरों वादों की पड़ताल क्राइम जंक्शन ने की तो अधिकतर पूरे नहीं मिले, पेश है ये रिपोर्ट..।


हमेशा भीड़-भाड़ होने के बावजूद नहीं बनवाया गया शौचालय
पांच साल पहले नगर पंचायत अध्यक्ष शांति कुशवाहा ने कस्बे को अतिक्रमण मुक्त कर बाजार को नए सिरे से स्थापित करने का वादा किया था। वादा तो वादा ही रह गया। नगर पंचायत व्यापारियों व बाहर से आने वालों के लिए एक शौचालय तक का इंतजाम नहीं कर सका। इसके अलावा जर्जर मार्ग भी दुरुस्त नहीं किए। बारिश के सीजन में यहां के लोग जलभराव की समस्या से कांप उठते हैं। पिछली बारिश में यहां के लोगों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा शुद्ध पेयजल की समस्या से स्थानीय लोग अलग से दोचार हो रहे हैं। अधिकतर सोलर लाइट जलती हैं, लेकिन पर्याप्त रोशनी नहीं है। हैंडपंप भी दगा दे रहे हैं।पार्किंग की व्यवस्था न होने से बाजार आए लोग हाइवे पर वाहन खड़ा कर अंदर जाते हैं। इस दौरान चोरी का भय अलग से बना रहता है। करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी, समस्या अभी भी जस की तस है।

अस्पताल में डॉक्टर के साथ गायब रहती है दवा 

अजुहा नगर पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। यहां डेढ़ साल पहले तैनात हुए चिकित्सक का तीन महीना पहले तक पता नहीं था। हाल ही में एक नए चिकित्सक की तैनाती हुई। चिकित्सक के आने के बाद से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन अब दवाएं नहीं है। स्टॉक न होने से मरीजों को बाहर से दवाएं लेनी पड़ती है। नगर पंचायत प्रशासन ने कभी भी यहां का हाल जानने तक की कोशिश नहीं की। न ही दवा की समस्या को दूर कराने का कभी कोई प्रयास किया।

जाम है सबसे बड़ी समस्या

अजुहा नगर पंचायत का कारोबार अभी भी जोरों पर चल रहा है। नवीन मंडी स्थापित होने के बाद बाजार का कारोबार जरूर प्रभावित हुआ है। गलियां इतनी संकरी है कि लोग अपना वाहन लेकर नहीं जाते हैं। रास्ते में ही लोग अपनी दुकान का काउंटर लगा देते हैं। गल्ला मंडी में पैदल चलना मुश्किल हो जाता है, यही हाल गुड़ मंडी का है। इसके अलावा अन्य मंडियों का यही हाल है। आमने-सामने से यदि साइकिल अथवा बाइक सवार दोपहर बाद आ जाते हैं तो उन्हें संभलकर चलना पड़ता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे