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बहराइच:जन्म-प्रसव पूर्व देखभाल व मैटरनल हेल्थ की जिले में खुली पोल,पढिये पीड़िता की ज़ुबानी


राजकुमार शर्मा
नानपारा,बहराइच।सोमवार इण्डो-नेपाल सीमा से सटे ब्लॉक बाबागंज में एक ऐसा वाकिया प्रकाश में आया है जिसे सुन कर आपके होश खराब हो जाएंगे।जहाँ एक ओर वर्तमान की राज्य सरकार व केंद्र में आसीन मोदी सरकार देश भर में चिकिस्ता व्यवस्था के चुस्त-दुरुस्त होने का दावा कर रही है। वही उत्तर प्रदेश सरकार की राजनीति के सिपेसलार सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकार में चिकित्सकीय क्षेत्र के कर्मचारी मौज काटते नज़र आ रहे है। ब्लॉक नवाबगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुछ ऐसा ही हाल है। पूर्व प्रदेश सरकार में जिस 108 एम्बुलेंस धक्का खाते हुवे देखना आम बात थी निःवर्तमान योगी सरकार में ये नौबत आज कर्मचारियों के लिए आन पड़ी है।24गुणे7 दिनों तक कार्य करने वाली इस स्वास्थ्य सुविधा कहने को तो हर सरकार के लिए एक महत्वकांक्षी कार्य है पर किसी भी जिले के जमीनी स्तर पर इस स्वास्थ्य सुविधा का सच कुछ और ही देखने को मिल रहा है।
आगे पढ़ें पूरा मामला
मालूम हो की विकाशखण्ड नवाबगंज क्षेत्र अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरदा को निमार्ण हुए तकरीबन पांच वर्ष से भी अधिक हो गए पर बदहाली की बात की जाए तो समय समय पर  कई बार इसके पोल खुलते नजर आते है । किसकी कमी को नजरन्दाज किया जाए । संबंधित तैनात अधिकारी  या फिर कर्मचारी की खास कर प्रशव पीड़ित मरीजों के लिए किसी जल्लादों से कम नही दिखते यहां तैनात एम्बुलेंस एम टी व कुछ चुनिंदा ए एनम । चिकित्सक महोदय जी का रहन सहन रुपईडीहा रहता है लिहाज गरीब जनता को ठगी का शिकार होना ,प्रशव पीड़ितों को समय पर इलाज न मिलना, कई बार बच्चो का खतरा होना,प्रशव पीड़ित के साथ कर्मचारी द्वारा अभद्र ब्यौहार किया जाना आदि अनेको अनेक इस अस्पताल के लिए आम बात है।क्यो गरीबो व मरीजो के साथ सौतेला जैसा ब्यौहार किया जाता इस प्रश्न का किसी के पास जवाब नही है। इसी क्रम में विगत 19 नवंबर को एक उदाहरण तकरीबन रात्रि 9 बजे सामने ऊभर कर आया जब भास्कर संवाददाता जमोग बाजार में तैनात था । यह वह अस्पताल के कर्मचारियो की करतूत है जो  सायद सभी  इससे संबंधित अधिकारियो को शर्मशार कर देत है । ज्ञात हो कि विगत 19 नवंबर को रात्रि 9 बजे एक महिला हासरून पत्नी सलीम निवाशी गोपालपुर चरदा को प्रशव पीड़ा हुआ जिसको लेकर उसके पति सलीम,माँ कालीमुन्निशा निवाशी अगय्या ,व सह्योगी महिला शालीमा निवाशी गोपालपुर सहित 108 डायल नंबर प्लेट नंबर यू पी 43 जी 0190 नंबर की एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल के गेट तक पहुँचाया गया । जहाँ मौके पर सन्नाटा पसरा हुआ था। इस दौरान प्रशव पीड़ित महिला पैदल अपने परिवार के साथ अस्पताल के दरवाजे को खटखटाई पर वहां कोई नही मिला । कुछ देर इंतजार करने पर तत्कालीन तैनात  एनम सावित्री चौधरी वहां पहुँची पर मरीज व उसके परिवार से अभद्र ब्यौहार करते हुए वापस हो गयी। तत्पचात पीड़ित महिला व उसके परिवार निराश हो कर एम्बुलेंस एम टी मोहम्मद नफिश व ड्राइवर ब्रिजनरेश के पास बाबागंज पी एच सी जल्दी पहुचाने की गुहार लगाई जहाँ एम टी ने हमारी ड्यूटी खत्म हो गयी अब हम कही नही जा सकते तुम दूसरा कोई सवारी खोज लो   कह कर खुद को किनारा करते हुए सड़क पर तमाशा देखने पर तुला रहा।जब कि नियमानुसार उसे अस्पताल में रजिस्टर पर अपना सिग्नेचर कर संबंधित नर्स को रिसीव करना होता है जो उसने नही किया। प्रशव पीड़ा अधिक हो रहा था जिसको लेकर संबंधित परिवार घबराए हुए रोने जैसा क्रियाकलाप वे कर रहे थे क्योंकि उस समय उन्हें कोई दूसरी सवारी भी नही उपलब्ध हो रहा था। पीड़िता से उसे सुबिधा उपलब्ध करने का दिलासा देने पर अस्पताल में हुआ उसके साथ बर्ताव को उसने विस्तार पूर्वक बया किया ।जिसको लेकर अस्पताल पहुचने पर संबंधित एम टी से पूछ ताछ किया तो वह गिडगिडाने लगा। वही एनम सावित्री ने अपना बचाव पछ रखते हुए खुद को मुद्दे से किनारा करने की कोसिस की । वही स्वस्थ कर्मचारी पंकज कुमार अस्पताल की कमियों को गिनाते हुए बताए कि यह इससे संबंधीत ब्यवस्था उपलब्ध नही है ।यहां सर्जन व रोग से संबंधित चिकित्सक से लेकर कई मरीजो से जुड़े हुए वस्तु उपलब्ध नही है कहते हुए अपना बचाव पछ रखा। प्रशव पीड़ित महिला ने सबसे चौकाने वाली बात  संवाददाता से कही वह था'" मुझे इस अस्पताल से डर लगता है किसी तरह मुझे यहाँ से रिफर करा कर बाबागंज पहुँचा दीजिए।" कारण पूछने पर  महिला व उसकी माँ ने बताया कि इससे पहले उसने तीन प्रसव पीड़ित को इलाज हेतु लाया गया पर इलाज दूर मरीज को अधिक समय तक रोकने के बाद रेफर कर दिया जाता है इस दौरन एक बच्चा भी खत्म हो चुका है और महिलाओं का इलाज अभी भी चल रहा है पर वह अभी भी ठीक नही हुई है। इस तरह के कई  आरोप एनम पर लगाया।जबकि एनम का कहना है कि इस महिला ने कोई प्रशव पीड़ित महिला को इलाज हेतु नही लायी है। विदित हो कि जब संवाददाता ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सक अर्चित श्रीवास्तव से पूछ ताछ की तो वह रुपईडीहा से तत्काल जमोग हॉस्पिटल पहुँच कर संबंधित एनम को फटकार लगाया ।मरीज को पी एच सी बाबागंज रिफर कराते हुए एम टी मोहम्मद नफिश से पूछ ताछ करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने की चेतावनी दी।
वही डॉक्टर श्रीवास्तव से मरीजो में बना इलाज से डर के बारे में पूछा गया तो वह कुछ भी कहने से इनकार होते हुए अस्पताल में सर्जन व चिकित्सा सामग्री उपलब्ध न होंना कारण बताया। यहाँ केवल अकेला ही चिकित्सक हु जिसे कागजातों से लेकर क्षेत्र तक व अस्पताल में मरीजो को भी इलाज करना होता है।
एक प्रश्न के जवाब में डॉक्टर श्रीवास्तव ने बताया सी एच सी बेहतर है पी एच सी  यहाँ एम्बुलेंस की कमी है कई बार उच्च अधिकारियों से 24 घंटे सेवा उपलब्ध रखने के लिए लिखित मांग भी किया है परंतु  अभी तक कोई सुनवाई नही हो सकी।
चिकित्सक कभी नही रुकते मुख्यालय पर
जानकारी अनुसार इस अस्पताल में मरीजो  को समय पर इलाज न होना आम बात है क्योंकि चिकित्सक कभी मुख्यालय पर रुकते ही नही उनके पास नवाबगंज का अतिरिक्त प्रभार भी है जिसके चलाते वे कभी रुपईडीहा तो कभी नवाबगंज  कैसे होगा मरीजो का इलाज केवल फार्मेसिस्ट के सहारे चलता है समुदायिक  स्वास्थ्य केंद्र चरदा। ने बिजली,न जगनेटर कई बार निरीक्षण के दौरान जगनेटर भी बंद पाय गया।कुत्तो के काटने पर वैक्सीन भी नदारद रहती है मरीज बाबागंज व चरदा के बीच इलाज के लिए दौड़ते रहते है पर इलाज नही हो पता नही।
उत्तर प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा (समाजवादी स्वास्थ्य सेवा ) 14 सितंबर 2012 को शुरू हुई थी। वहीं 102 एम्बुलेंस सेवा (नेशनल एम्बुलेंस सर्विस) की शुरुआत 17 जनवरी 2014 को हुई थी। प्रदेश में जीवीके एमआरआई संस्था इनका संचालन कर रही है।
बॉक्स में
क्या है 108
108 तीन अंकों का एक निशुल्क नंबर है। इसका उपयोग चिकित्सा, पुलिस व आग से सम्बंधित आपातकालीन स्थितियों में किया जाता है।108 सेवा एक निशुल्क सेवा है जो 24 घंटे व 365 दिन जनहित के लिए उपलब्ध है। 108 नंबर किसिस भी मोबाइल फोन या लैंडलाइन से डायल किया जा सकता है। 108 सेवा समाबज के हर वर्ग के लिए है, इसमें एपीएल और बीपीएल का कोई बंधन नहीं है।
 कब डायल करें 108 नंबर 
दिल का दौरा (हार्ट अटैक ) पड़ने पर। तेज पेट दर्द, सांस में तकलीफ होने पर। किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर। जानवरों के काटने, अचानक बेहोश होने पर। जब कोई अपराध हो रहा हो या आग लग गयी हो , उस समय फायर बिग्रेड और एम्बुलेंस की आवश्यकता हो। इसके आलावा अन्य किसी प्रकार की इमरजेंसी की स्थिति में। 
102 क्या है 
102 तीन अंकों का टोल फ्री नंबर है और इस पर फ़ोन करने वाले को कोई पैसा नहीं पड़ेगा।102 सेवा एक निशुल्क एम्बुलेंस सेवा है, इस पर 24 घंटे व 365 दिन फ़ोन किया जा सकता है। 102 नंबर पर लैंडलाइन और मोबाइल दोनों से कॉल की जा सकती है। 102 नंबर पर फ़ोन करने के बाद शीघ् ही नजदीकी एम्बुलेंस कॉल के लिए पहुंचेगी। 
कब डायल करें 102 
102 एम्बुलेंस सेवा में गर्भवती महिला को घर से  अस्पताल तक लाने और वापस घर तक छोड़ने की मिलती है। इसके आलावा बेहतर इलाज के लिए गर्भवती महिला व शिशु को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक छोड़ा जाएगा। इस एंबुलेंस सेवा में एक साल तक के बच्चों को किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर घर से अस्पताल लाने और वापस अस्पताल से घर छोड़ने की उपलब्ध है।
बताते चले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने बैसाखी के मौके पर (13 अप्रैल 2017 को) राज्य में एडवांस एम्बुलेंस सेवा-108 का उद्घाटन किया था। इस मौके पर उन्होंने कहा था कि इस सेवा से राज्यवासियों को लाभ होगा और उनका स्वास्थ्य सुधरेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह एलान किया कि हर 15 मिनट में लोगों को एम्बुलेंस उपलब्ध होगी। उन्होंने कार्यक्रम में कहा था कि अगर एम्बुलेन्स समय से न पहुँचे या एम्बुलेंस में उपकरण नहीं चले तो संचालक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा।

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