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सुल्तानपुर:बिखरने देंगे न हिंदुस्तान की पहचान, हम एकता के लिए अपनी जां लुटा देंगे


देशभक्ति से ओतप्रोत का पाठ कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया
सुल्तानपुर।रविवार को सुप्रसिद्धि कवि स्व. मानबहादुर सिंह की स्मृति में उघड़पुर चौराहे पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का शुभारंभ करते हुए अवधी के सुप्रसिद्ध कवि अशोक टाटम्बरी ने प्रकृति का सजीव चित्रण करते हुए "महकै लगै, दिगंत तो समझौ बसंत है। बहकै लगे जौ कंत तो समझौ बसंत है।।" पढ़ा तो उपस्थित लोगों ने जमकर तालियां बजाई। वर्तमान राजनीति व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने जब सुनाया, ''ई राजनीति होइगै अन्हरा कै व्यवस्था। हम जेका कीन गद्दा औ चदरा कै व्यवस्था, राखे न हमरे बरे ऊ चिथरा कै व्यवस्था ।।" लोगों ने जमकर ठहाके लगाए। फैजाबाद से पधारे हास्य व्यंग्य कवि तारा चन्द 'तन्हा' ने फिल्मी नामों को पढ़ते हुए, "दो प्रेमी, नदिया के पार, लैला मजनू, गिरफ्तार। आवारा, साजन, पाकेटमार, चोर, लुटेरा, थानेदार।"  सुनाया तो हंसी के ठहाके गूंज पड़े। अवधी कवि मदन मोहन पाण्डेय 'मनोज' ने युवाओं पर व्यंग करते हुए पढ़ा 'करैं नकल श्री किशन कै, कहैं रचाऊब रास। वै अंगुरी पै गिरि धरे, एनसे उठै न बांस।। " इसके पूर्व प्रबन्धक अजय सिंह ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, किसी भी राष्ट्र व समाज निर्माण में कवियों की भूमिका अहम होती है। समाजसेवी चन्द्रशेखर शुक्ल व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शारदा प्रसाद श्रीवस्तव ने कार्यक्रम में पधारे कवियों व कवयित्रियों को साधुवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में त्रिफला, मथुरा प्रसाद जटायु, डा. श्याम जी पाण्डेय, रमाशंकर, डा. शुशील पाण्डेय, अभिमन्यु शुक्ल, राम बक्स सिंह, डा. देवनरायन शर्मा आदि ने देर रात तक काव्य पाठ किया। आयोजक पारस नाथ व बजरंग बहादुर सिंह ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम में पहुंचे थानाध्यक्ष गोसाईंगंज अमरनाथ विश्वकर्मा को साल भेंट कर सम्मानित किया

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