राकेश गिरी
बस्ती । उत्तर सरकार के लाख दावे के बावजूद चीनी मिल मालिकों की हठधर्मी जारी है बस्ती जिले में 2 साल से बजाज ग्रुप वाल्टरगंज शुगर मिल को बंद करने पर उतारू है जिसे अधिकारियों की मिलीभगत ने आखिरी कील ठोंक दी है। हालांकि इससे पहले समाजवादी पार्टी के शासनकाल में मिल को बंद करने की साजिश रची थी लेकिन कंपनी कामयाब नहीं हो सकी थी इलाके चर्चा अब इस बात पर हो रही है कि किसानों की असली हितैषी कौन।
एक जमाना था जब बस्ती जिले में चार सुगर मिल थी लेकिन एक एक कर शुगर मिले बंद होती गई और मौजूदा हाल में वाल्टरगंज शुगर मिल बन्दी की कगार पर है। जो प्रशासनिक अक्षमता होगी।इस बंदी के बाद जिले में मात्र एक सुगर मिल बचेगी इसी आशंका को लेकर वाल्टरगंज चीनी मिल क्षेत्र के किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार की है। किसानों ने भेजें पत्र में मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि गन्ना आयुक्त द्वारा मिल के लिए सुरक्षित गन्ना क्रय क्षेत्र को अन्य चीनी मिलों को दे दिया है जिसके चलते दो साल से गन्ना मिल के लिए पर्याप्त नहीं मिल पाता था जिसके चलते किसानों का 32 करोड़ रुपए आज भी बकाया है। किसानों ने कहा है कि मौजूदा सीजन का सत्र आरंभ होने जा रहा है और चीनी मिल के सुरक्षित एरिया को गन्ना आयुक्त द्वारा कटौती कर अन्य चीनी मिल को आवंटित कर दिया गया है ऐसे में जब मिल क्षेत्र का गन्ना आवंटन पर्याप्त नहीं होगा तो मिल चलने की संभावना शून्य के बराबर है अगर आंकड़ों की बात करें तो गन्ना क्षेत्र 2015-16 में 13292 हेक्टेयर था और 16-17 में 14780 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल वाल्टरगंज शुगर मिल के हिस्से में था गन्ना आयुक्त द्वारा क्षेत्र की कटौती किए जाने से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है एक तरफ 32 करोड़ रुपए के बकाए में उनकी सास अटकी पड़ी है तो दूसरी ओर वाल्टरगंज मिल क्षेत्र से गन्ना क्षेत्र की कटौती ने उनके दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं कि आखिर नगदी फसल के लाभ से जो उनके बच्चों की परवरिश और शादी ब्याह होता था उसका क्या होगा इसे सोच-सोच कर किसान हैरान और परेशान है। उधर क्षेत्र की कटौतीे के बारे में जिला गन्ना अधिकारी ने बताया जो मिले अच्छा काम कर रही हैं उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप गन्ना क्षेत्रों का आवंटन किया गया है जिससे किसानों को समय पर उनके गन्ना मूल्य का भुगतान मिल सके।


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