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बस्ती:सृजनात्मक पुस्तकें मनुष्य के जीवन की दिशा बदलने में सक्षम-चन्द्रमोहन गर्ग


7 दिवसीय पुस्तक मेले का उद्घाटन
राकेश गिरी 
बस्ती । सृजनात्मक पुस्तकें मनुष्य के जीवन की दिशा बदलने में सक्षम हैं। योग्यता, क्षमता, दक्षता के लिये गुरूजनों के बाद पुस्तकों का ही महत्व है। यह विचार ज्वांइट मजिस्टेªट बस्ती सदर चन्द्र मोहन गर्ग ने मंगलवार को प्रेस क्लब में  आयोजित 7 दिवसीय पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुये व्यक्त किया।
राजाराम मोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान कोलकाता, सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार और युवा विकास समिति के संयोजन में आयोजित 7 दिवसीय पुस्तक मेले के उद्घाटन अवसर पर धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय कृत ‘मां की यादें’ का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। 
इस अवसर पर पुस्तकों पर केन्द्रित गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये वरिष्ठ साहित्यकार रामनरेश सिंह ‘मंजुल’ ने कहा कि मां और पुस्तकें दोनों को अलग नहीं किया जा सकता, जरूरत है पुस्तकों को खरीदकर पढने की आदत डाली जाय।
राजेन्द्रनाथ तिवारी ने पुस्तकों की उपादेयता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डा. दशरथ प्रसाद यादव, श्रीराम त्रिपाठी, उमाशंकर मिश्र, प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, अवधेश त्रिपाठी, संजय द्विवेदी, अखिलेश दूबे, सत्येन्द्रनाथ ‘मतवाला’ कुलदीप सिंह आदि ने किताबों की दुनियां, उनके महत्व, घटती पठनीयता आदि के विभिन्न विन्दुओं पर अपने विचार व्यक्त किये। कहा कि किताबों का संसार सदैव आलोकित रहेगा। 
अतिथियों ने संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिये रंजना अग्रहरि और ‘ मां की यादें’ के रचयिता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। 
कार्यक्रम संयोजक वृहस्पति कुमार पाण्डेय ने बताया कि पुस्तक मेले में देश के अनेक प्रतिष्ठित प्रकाशन हिस्सा ले रहे हैं और यहां ज्ञान विज्ञान, छात्रों के लिये  विषयगत पुस्तकों, उपन्यास, कहानी, धर्म, स्वास्थ्य के साथ ही अनेक ज्ञान वर्धक पुस्तके     उपलब्ध हैं । संचालन करते हुये भृगुनाथ त्रिपाठी पंकज ने पुस्तक मेले के सन्दर्भ में विस्तार से जानकारी दी। पुस्तक मेले के संयोजन में राजेश मिश्र, अनूप मिश्र, लालजी सिंह, राधेश्याम चौधरी, आलोक शुक्ल, शचिन्द्र शुक्ल, विशाल पाण्डेय, विवेक कुमार मिश्र, प्रेमचन्द्र शर्मा, महेश्वरनन्द शुक्ल, अभिनव चर्तुवेदी, दयानन्द ओझा, संजीव पाठक, सर्वेश मिश्र, शंकर सिंह, मो. हुसेन, सागर अरोरा आदि योगदान दे रहे हैं। 
उदघाटन अवसर पर अमरेश चन्द्रा, लालमणि प्रसाद, सर्वेष्ट मिश्र, के.के. उपाध्याय, राम प्रसाद त्रिपाठी, उमाशंकर मिश्र, भावेष पाण्डेय के साथ ही अनेक साहित्यकार, पुस्तक प्रेमी, प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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