सुनील उपाध्याय
बस्ती । नव वर्ष की पूर्व संध्या पर निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान द्वारा रविवार को डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग के आवास विकास स्थित आवास पर साहित्यकार त्रिभुवन प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
काव्य गोष्ठी मंें डा. वी.के. वर्मा की रचना ‘ कोहरा छाया है घना, तम से घिरा प्रभात, सूरज दादा निकलिये कांप रहा है गात। नये वर्ष का आ गया स्वर्णिम सुखद प्रभात, दुःख के कीचड़ में खिला खुशियों का जलजात।। को सराहा गया। सागर गोरखपुरी ने कुछ यूं कहा ‘ जिन्दगी की शमा हमेशा जलती रहे। जिन्दगी की गाडी यूं ही चलती रहे। लालमणि प्रसाद की रचना ‘ जद्दोजहद के दरमियां बीता पिछला साल। आरजू है नववर्ष में रहें सभी खुशहाल।। को वाहवाही मिली।
संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि डा. राम कृष्ण लाल जगमग के दोहे ‘ यही कामना अधर पर रहे सदा मुस्कान। नया वर्ष दे आपको सुख, समृद्धि सम्मान।। जिन्दगी का फिर मजा मैं पा गया, मन-व्योम पर मेघ बनकर छा गया। यह दुआओं का असर है आपके मौत के मुंह से निकलकर आ गया।। को सराहा गया। कलीम वस्तवी की रचना ‘ दामन में लायें खुशियां ही खुशियां समेटकर। हो अहले वतन को ऐ नया साल मुबारक।। सत्येन्द्रनाथ मतवाला की रचना ‘ आओ हम सब मिलकर स्वागत करें नया साल। अनीतियों, बुराईयों को ऐ बंदे तू हृदय से निकाल। जगदम्बा प्रसाद भावुक की रचना ‘ जिसने जीवन भर किया लोगांे पर अन्याय। आज वही सरपंच बन करते सबका न्याय’’ को सराहा गया।
काव्य गोष्ठी में डा. अफजल हुसेन अफजल, बाबूराम वर्मा, अनवर पारसा, विश्वनाथ वर्मा, नीलम श्रीवास्तव आदि ने नव वर्ष पर केन्द्रित रचनायें पढी।


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