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हजारों खवाहिशें ऐसी कि हर खवाहिश पे दम निकले.................


राकेश गिरी 
बस्ती । प्रेमचंद साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा बुधवार को कलेक्टेªट परिसर मंे उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब की 221 वीं जयन्ती सत्येन्द्रनाथ मतवाला की अध्यक्षता और हरीश दरवेश के संचालन में मनाया गया।
मुख्य अतिथि ओम प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि मिर्जा गालिब उर्दू अदब के बड़े शायर थे। उन्होने फारसी में अधिक, उर्दू में कम लिखा, जो लिखा वह बेमिसाल है।
वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि मिर्जा गालिब का असली नाम मिर्जा असद-उल्लाह बेग खान था, उनका जन्म उस दौर में हुआ जब मुगल कमजोर हो चुके थे और अंग्रेजों का पूरे देश पर शासन था।  मिर्जा गालिब को मुगल काल का आखिरी महान शायर कहा जाता है।  उनकी शायरी ‘‘हैं और भी दुनिया में सुखन-वर बहुत अच्छे, कहते हैं कि ‘गालिब’ का है अंदाज-ए-बयाँ और। ‘हजारों खवाहिशें ऐसी कि हर खवाहिश पे दम निकले। बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।।’ आज भी लोगों की जुबान पर है। वे हर युग में लोगों के चहेते बने रहेंगे। 
मिर्जा गालिब की जयन्ती पर आयोजित कार्यक्रम में डा. राम कृष्णलाल ‘जगमग’ , डा. राम दुलारे पाठक, कमलापति पाण्डेय, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, कैप्टन आतिश सुल्तानपुरी, जगदीश, दीनानाथ, विनय कुमार एडवोकेट आदि उपस्थित रहे। 

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