शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ।जिला कचहरी के शेड नंबर 4 में सृजना साहित्यिक संस्था द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कवि / साहित्यकार पंडित श्याम नारायण मिश्र "श्याम" की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसका संचालन पंण्डित सुरेश नारायण दुबे "व्योम" ने किया । कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मदेव साहित्य समाज के अध्यक्ष पंडित प्रेम कुमार त्रिपाठी "प्रेम "ने अपनी वाणी वंदना से शुरू किया ।गोष्ठी में लालगंज तहसील के शमशेरगंज से पधारे कवि डॉक्टर अरुण कुमार रत्नाकर ने पढा-- कीचड़ में पैर रखोगे धुलना ही पड़ेगा, गलती अगर हुई है तो झुकना ही पड़ेगा । इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए उदयराज मिश्र उजज्ड ने पढा -- सभी संबंध का रस प्रेम पावन सी निशानी है, कभी राधा बनी पागल कभी मीरा दीवानी है । इस मौके पर संगोष्ठी के आयोजक वरिष्ठ कवि/ साहित्यकार डॉ दयाराम मौर्य रत्न ने पढ़ा -- प्रतिमा का पाषण बनो तुम मंदिर में पूजे जाओगे, बीच राह का पत्थर बनकर ठोकर खाते मत रहना । अध्यक्षता कर रहे हैं पंडित श्याम नारायण मिश्र श्याम ने पढा -- मैंने पूजा पत्थर को जीवनदान मिला, उर पिघला गंगा यमुना का वरदान मिला। प्रेम कुमार त्रिपाठी प्रेम ने पढ़ा - ख्वाबों में जो थी बनी रातरानी, खुली जब पलक बन गई एक कहानी । कवि /पत्रकार शिवेश शुक्ल ने पढा - आईना आज मुझसे, एक बात.. बोल बैठा, ना जाने कैसे ! लेकिन, एक राज़ खोल बैठा। पंडित सुरेश नारायण द्विवेदी ने पढा - ढाई आखर की पुस्तक में मेरा मन बंजारा लिख दो ।इस मौके पर राम अवध मौर्य, पं• सत्येन्द्र द्विवेदी एडवोकेट, रूद्रनारायण मिश्र, विष्णु नारायण, एमएल गौतम, श्याम बहादुर सिह, विनय, परमानन्द मिश्र, समेत आदि लोग मौजूद रहे ।


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