मिथिलेश शुक्ला (नीतू)
पालीथीन का उपयोग न करने के लिए संकल्पित हुए शिविरार्थी
गोंडा / बभनान:वृक्षों का उदाहरण तो लोग कहावतों, मुहावरों में भी करते हैं। वृक्ष स्वयं अपने फल नहीं खाते, वृक्ष स्वयं अपनी छाया में नहीं बैठते। वृक्ष अपने लिए नहीं जीवों के लिए अपना सब कुछ समर्पित करते हैं। वृक्ष हमारे जीवन में विशिष्ट महत्व रखते हैं। वृक्षों के बिना सृष्टि की कल्पना करना व्यर्थ हैं। वास्तव में पेड़ धरती का श्रृंगार है। इनके बिना धरती की शोभा नहीं है। यही शोभा जीवों के लिए जीवन है।
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यह बातें जे देवी महिला महाविद्यालय बभनान के सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का उदघाटन करने रे बाद शिविरार्थीयो से कहीं। साथ ही बच्चों को पालीथीन का उपयोग न करने के लिए संकल्प दिलाया। बच्चों को वृक्षों के प्रति जागरूक रहने व विभिन्न आवश्यकताओं के बारे में बताया। उन्होने कहा कि पेड़ों के प्रति जागरूक होने की भी आवश्यकता है एक समय ऐसा भी था जब पीपल, तुलसी आदि पेड़ों को पूजा भी जाता था। इन्हीं पेड़ पौधों से हमे रोगों से दूर रखने के लिए दवाईयाँ भी बनाई जाती थी। यें पेड़ मानव एवं पशुओं को बीमारी से बचाते थे। नीम के पेड़ के नीचे रहने से एलर्जी व सांस से संबंधित रोग नहीं होते हैं। इनकी पत्तियों एवं छाल से लोग दवाईयां भी बनाते हैं। खेत में नीम का पेड़ होने पर दीमक नहीं लगती तथा खेत उपजाऊ होता है। भूमि में नमी बनाए रखता है। यह पेड़ ऐन्टीफंगस, ऐंटीबायोटिक एवं एंटी बैक्टीरियल होता है। हानिकारक कीड़े-मकोड़ो को भी समाप्त करता है। कार्यक्रमाधिकारी डाॅ राजेश कुमार श्रीवास्तव, डॉ संतोष तिवारी ने मुख्य अतिथि व आगंतुको रे प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ किरन, डॉ राजकुमार ,डॉ भूपेश, सरिता, संगीता, एकता, सीमा, नेहा सहित महाविद्यालय के छात्र छात्राएं सहित तमाम लोग मौजूद रहे।



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