अलीम खां
अमेठी मुसाफिरखाना -यनि मनुष्य को अपने लक्ष्य से भटकना नही चाहिये उसे अनवरत अपने कार्य को तबतक जारी रखे जाना चाहिये जब तक उसका लक्ष्य हासिल न हो जाये।ये बाते क्षेत्र के मुहीउद्दीनपुर के मजरे हाजीगंज स्तिथि शिव मंदिर पर आयोजित बोल बम काँवरिया समिति द्वारा चल रही सात दिवसीय संगीत मयी श्री मदभागवत कथा के अंतिम दिवस कथावाचक आचार्य सूर्यभान पाण्डेय ने भक्तो को कथा का रसपान कराते हुये कही।आचार्य ने बिभिन्न कथाओ का वर्णन कर सभी के चरित्रो पर प्रकाश डालते हुए भक्तो को उसी कथानुसार अपने मानव जीवन के सदगुणों से संपन्न होना चाहिये।छोटे छोटे बच्चों ने सातो दिवस की कथाओ में अनेको अनेक झांकिया श्रद्धालुओं के प्रति प्रस्तुत की।आचार्य पाण्डेय जी अंतिम दिवस की कथा में भक्तो को कथा रसपान कराते हुए कहा की भागवत शास्त्र का आदर्श दिब्य है ।सुख दुःख तो मन की कल्पना है मुनष्य जब ईस्वर से प्रेम करता है तो ईस्वर मनुष्य को भी ईस्वर बना देते है।जो सदगुणों से संपन्न है वह ईस्वर है और असंतुष्टि ब्यक्ति दरिद्र।उन्होने अंतिम शब्दों में कहा कि गौ दान से बड़ा कोई दान नहीं गौ माता के शरीर में समस्त देवताओ का वास् होता है गौमाता के गोबर से लेकर दूध अर्थात गाय के शरीर से प्राप्त सभी तत्वों से लाभों का बखान करते हुये लोगो के समझ कही।कार्यक्रम की देखरेख कर रहे जंगबहादुर चौकीदार ने बताया की आगामी 15 तारीख को बिशाल भण्डारे का आयोजन भी किया गया है जिसमे क्षेत्र के हजारो की संख्या में लोग समिलित होंगे।कथा में संजय गुप्ता जंगबहादुर राणाप्रताप मनोहर राधे जगदीश यादव सुर्जलाल रामबख्श जोखन मोहित गुप्ता रणजीत बिनोद सोनू मायावती रामधीरज शर्मा बिश्वनाथ आदि लोग मौजूद रहे।


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