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गोण्डा:मनकापुर स्टाफ नर्ष की लापरवाही से प्रसूता की मौत का मामला , क्या आशाराम को मिल सकेगा न्याय ?


गोण्डा। जिसके लापरवाही से किसी की जान चली जाए उसे जब  महकमें के अधिकारी बचाव करते हुए दंड के नाम पर महज स्थानातरण करके कोरम पूरा कर अपना कर्तव्य निर्वाहन करते है तो ऐसे अधिकारी भले ही विभागीय निरिक्षण करे या क्षेत्र भ्रमण करे इन पर भरोषा करना पत्थर से सर फोड़ना होगा |

बीते दिनो सीएचसी मनकापुर के डाक्टर व स्टाफ नर्स की लापरवाही से एक प्रसूता को जिंदगी से हाथ धोना पडा था।मामले में पीडिता के पतिं मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियो से न्याय की गुहार लगाई है।
      बताते चले कि बीते माह एक जनवरी की देर रात लगभग एक बजे सीएचसी मनकापुर  क्षेत्र के ग्राम कटहर बुटहनी के मजरे कटहरिया गांव निवासी दलित आशाराम की बाईस वर्षीय पत्नी संगीता को प्रसव पीडा हुई तो वह एक निजी वाहन से सीएचसी लाया। बताया जाता है कि स्टाफ नर्स ज्योति वर्मा ने प्रसूता के साथ दुर्व्यवहार किया और अपने सरकारी आवास  पर सोने चली गयी।इसी तरह प्रभारी अधीक्षक गुलाम मुनुद्दीन भी अपने कमरे में आराम फरमा रहे थे।परिजनो ने थक हार कर जिला अस्पताल का रुख किया तो गोण्डा ले जाते समय सीएचसी मात्र पांच किलो मीटर झिलाही में वाहन में ही एक बालिका को जन्म दिया।प्रसूता की तब सीएचसी काजीदेवर में मौजूद चिकित्सक को दिखाया।वहां प्राथमिक इलाज कर जिला महिला अस्पताल रवाना हो गये।जिला अस्पताल पहुंचते ही प्रसूता की मौत हो गयी।
    स्टाफ नर्स की लापरवाही का मामला गोंडा: सोते रहा मनकापुर स्वास्थ्य महकमा तड़फ तड़फ कर हुई प्रसूता की मौत शीर्षक से  CRIMEJUNCTION की सुर्खिया बना तो अधिकारियो की निंद्रा भंग हुई और आनन-फानन में में दोषी पाई गई स्टाफ नर्स ज्योति वर्मा को बभनजोत सीएचसी स्थानान्तरित कर इतिश्री कर ली गयी।लेकिन कठोर कार्यवाही व न्याय की आशा में आशाराम को एक पखवारा इंतजार करते बीत गया।मृतका के पति ने सूबे स्वास्थमंत्री व सीएमओ को आन-लाइन शिकायत पत्र भेज कर न्याय की गुहार लगाई है।अब देखना है कि विस्तृत जांच के बाद गाज किस-किस पर गिरती है?शुक्रवार को मुख्य चिकित्साधिकारी एसके श्रीवास्तव ने सीयचसी मनकापुर में आयोजित एएनएम के मीटिंग में भी सीएचसी मुजेहना व मनकापुर के साथ कार्यवाही बात दोहराते हुए क्षेत्र में बने रहने के आवस्यक दिशा-निर्देश दिये थे।शासन ने  मनकापुर के प्रसूता के मौत के मामले को गम्भीरता से लेते हुए सीएमओ को जांच के आदेश दिये थे।

शुक्रवार को सीएमओ का औचक निरीक्षण के उपरांत क्षेत्र भम्रण को इसी प्रकरण को जोड कर देखा जा रहा है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि क्या मंत्री व उच्चाधिकारियों से गुहार लगाने के बाद दलित आशाराम को न्याय दिलाते हुए सीएमओ गोंडा लापरवाह चिकित्सा अधिकारियो  व स्टाफ नर्ष के विरूद्व कठोर कार्यवाही करने की हिम्मत जुटा पायेंगे या  दलित आशाराम को न्याय के लिए अभी दर दर भटकना होगा |
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