राजकुमार शर्मा
बहराईच:ग्लोबल वार्मिंग का असर मानव जाति के साथ-साथ पशु पक्षियों पर भी नजर आने लगा है जिससे पक्षियों की वह प्रजाति विलुप्त होती जा रही है जो हमारे समाज में एक विशाल विशेष स्थान रखते हैं अगर यही स्थिति बनी रही तो एक दिन यह प्रजाति भी आने वाली पीढ़ी को केवल किताबों के पन्ने पर ही नजर आएगी।
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प्रदेश का पक्षी सारस इससे अछूता नहीं है पक्षी संरक्षण में जुड़े लोग इसका कारण नम क्षेत्रों की कमी और जलवायु परिवर्तन को मान रहे हैं सरकारी आंकड़े पर नजर डाली जाए तो 2013 में सारस पक्षी की गणना कराई गई थी जिसमें स्थिति काफी भयानक नजर आई पूरे जनपद में केवल 1628 ही सारस जीवित बचे मिले थेअगर इन संरक्षण पर सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिया गया तो यह प्रजाति कुछ समय बाद समाप्त हो जाएगी क्योंकि वन में रहने के लिए इन के अनुसार उनको पर्याप्त साधन नहीं मिल पा रहे हैं वही ऊपर से ग्लोबल वार्मिंग का असर भी इन पंछियों पर पड़ता नजर आ रहा है जहां एक ओर ग्लोबल वार्मिंग मनुष्य के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है वही पक्षियों पर भी इनका असर साफ देखने को मिल रहा है दिसंबर 2012 में कराई गई सारसों की गणना जिले में 1724 सारस पाए गए थे जबकि वर्ष 2010 11 मे कराई गई गणना में सारसों की संख्या 2120 थी 3 वर्ष में सारसों की संख्या में 300 की कमी दर्शाई गई है इससे साबित होता है कि जिले में सारस महफूज नहीं है आगरा मंडल में सर्वाधिक सारस मैनपुरी और इटावा क्षेत्र में पाए जाते हैं पूर्व में जिले में नम के स्थानों की कमी के चलते सारसों पर संकट और पलायन की बात की जाती रही है गड़ने के दौरान भी यह तथ्य सामने आया कि पूर्व में जहां सारसों की संख्या अधिक पाई गई थी वही इस बार संख्या में खासी कमी आई सांरसो ने नाहर और राजवा हो बड़े तालाब जहां पानी की अधिकता थी उन क्षेत्रों में पलायन किया है बार-बार गणना होने के बावजूद भी सरकार या प्रशासन ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जिससे यह प्रजाति विलुप्त की ओर अग्रसर हो रही है वन्यजीव संरक्षण अधिकारी इन सारसो के जीवन को बचाने के लिए उनका विभाग नाकाम साबित हो रहा हैइन जीवों पर ग्लोबल वार्मिंग का असर साफ साफ नजर आता है उसके बाद भी इनके बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं ।



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