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इस तरह सोशल मीडिया पे छलका SDM तिलोई का दर्द, अधिकतर अधिकारी बीमार होते जा रहे हैं योगी जी

अलीम खान 
अमेठी (यूपी). सरकारी मिशनरी द्वारा सरकार और उसके कामकाज पर उंगली उठाना इस बात का सार्थक है कि सिस्टम में ज़बर्दस्ती आर्डर थोपने से पब्लिक के साथ साथ वो सभी हलाकान हैं जो सरकार के मातहत हैं। फ़िलहाल एसडीएम तिलोई अशोक कुमार शुक्ला की फेस बुक आईडी पर उनके द्वारा की गई पोस्ट को देख कर ऐसा ही प्रतीत होता है।
ग़ौरतलब हो कि सोमवार को अपने फेस बुक वाल पर एसडीएम तिलोई ने एक पोस्ट शेयर किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। 
एसडीएम तिलोई :अशोक कुमार शुक्ला

अपनी पोस्ट पर उन्होंंने सरकार के सिस्टम पर तंज़ कसते हुए लिखा है कि 'कल मीटिंग के नाम पर 2 बजे से प्रातः 12:40 तक बैठा रहा। आपके अधिकतर अधिकारी बीमार होते जा रहे हैं योगी जी.!' 
जिसको लोगों ने सराहा भी और अपने कमेंट्स भी पोस्ट पर दिये। 
फ़िलहाल एसडीएम अशोक कुमार शुक्ला का कहना है कि ये उनका दर्द है, पोस्ट नहीं। 

आपको बता दें कि अभी कुछ दिन पहले सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर सांख्यिकी रश्मि वरुण के पोस्ट से सोशल मीडिया परकासगंज हिंसा की तुलना सहारनपुर के मामले से करते हुए अपने मन की बात लिखी है। जिस के बाद अब नई बहस छिड़ गई है। डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण ने फेसबुक वाल पर लिखा है कि  “तो ये थी कासगंज की तिरंगा रैली। ….  कोई नई बात नहीं है ये, अम्बेडकर जयंती पर सहारनपुर सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी। जिस से अम्बेडकर गायब थे, या कहिए कि भगवा रंग में विलीन हो गये थे … कासगंज में भी यही हुआ। तिरंगा तो शवासन में रहा भगवा ध्वज शीर्ष (आसान) पर …  जो लड़का मारा गया उसे किसी दूसरे तीसरे समुदाय ने नहीं मारा उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा, जो नहीं बताया जा रहा वो ये कि अब्दुल हमीद की मूर्ति या तस्वीर पे तिरंगा फहराने की बजाये इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई। और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया”। 


वहीं बीते 30 जनवरी को बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कासगंज उपद्रव को लेकर फेसबुक पर लिखा था कि ‘अजब रिवाज बन गया है।  मुस्लिम मोहल्‍लों में जबर्दस्‍ती जुलूस ले जाओ और पाकिस्‍तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ।  क्‍यों भाई, वे पाकिस्‍तानी हैं क्‍या? यही यहां बरेली में खैलम में हुआ था। फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए…”। 

दरअसल पिछली जुलाई में कांवड़ यात्रा के दौरान जब मुस्लिम बहुल खैलम से यात्रा निकालने की कोशिश की गई तो उसके बाद मचे बवाल में कांवडि़ए और आईटीबीपी के 15 जवान घायल हो गए थे उसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई और करीब ढाई सौ लोगों को पकड़ा गया।
डीएम अपनी पोस्‍ट में इसी घटना का जिक्र कर रहे थे। एक दूसरी पोस्‍ट में डीएम राघवेंद्र बिक्रम सिंह ने सवालिया लहजे में पूछा, ”चीन तो कहीं ज्‍यादा बड़ा दुश्‍मन है, उसके खिलाफ नारे क्‍यों नहीं लगाए जाते? चीन तो बड़ा दुश्‍मन है, तिरंगा लेकर चीन मुर्दाबाद क्‍यों नहीं?”

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