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सच्चे प्यार और भक्ति से ही होते है भगवान के दर्शन : पं• बेंकट देशिकाचारी





बराछा गॉव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा 

शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ । सदर विकास खण्ड के बराछा गॉव में ब्रह्मलीन राम सुन्दर राय एंव सावित्री देवी के पुण्य स्मृति में संगीतमयी श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन मुख्य यजमान श्रीमती उर्मिला एंव पं• अमरनाथ राय के संयोजकत्व में जिसमें कथा ब्यास के रूप में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या धाम के पं• बेंकट देशिकाचारी जी महराज के मुखार विंदु से हो रही है ।

सोमवार को कथा के सातवें दिन की भागवत कथा में कथावाचक श्री पं• बेंकट देशिकाचारी महराज जी  ने रूक्मिणी विवाह व कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि रूक्म देश की राजकुमारी रूक्मिणी का यूं तो विवाह शिशुपाल नामक क्रूर राजा के साथ तय हो गया था लेकिन रूक्मिणी भगवान कृष्ण को चाहती थीं और रूक्मिणी के ही आमंत्रण पर श्रीकृष्ण ने शिशुुपाल और रूक्म के दस हजार रक्षकों को परास्त करके रूक्मिणी का अपहरण किया और बाद में विवाह किया। यह श्री कृष्ण के पौरूष का प्रत्यक्ष उदाहरण रहा। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण का रूप इस तरह लुभावना था कि शिशुपाल के सारे के सारे सैनिक मंत्रमुग्ध हो गये। उन्हांने कहा कि सच्चे प्यार और भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हो जाते हैं। चूंकि देवी रूक्मिणी श्रीकृष्ण को दिल और आत्मा से प्रेम करती थीं। इसलिए उन्हें भगवान के दर्शन प्राप्त हुए।कथा वाचक ने कहा कि आज मनुष्य अपनें कर्तव्यों को भूलता जा रहा है।

वह त्वरित लाभ की कामना से कर्म तो करता है किन्तु उसका आदि अन्त नही परखता। जिसके चलते वह दुखों की ओर अग्रसारित हो रहा है। उन्होनें बढ रहे अनाचार पर कटाक्ष करते हुये कहा कि यदि समय रहते मानव अपनें कर्म और विचारों से मलिनता दूर नही करता तो निश्चित रूप से वह पापी हो जायेगा । इस दौरान कृष्ण की झॉकी निकाली गई ।

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