तेजगढ़ मे दिनदहाड़े गोलीबारी को लेकर एडीजी का चढ़ा पारा, एसपी की हड़क पर लिखा केस
लालगंज प्रतापगढ़। जानलेवा हमले तक के मामले मे पुलिस पीडित की एफआईआर लिखने मे किस कदर आनाकानी करती है। इसका उदाहरण अपना बेल्हा है। पीड़ित की एफआईआर जांच के नाम पर टरकाने से आजिज आये फरियादी ने जब इलाहाबाद परिक्षेत्र के अपर पुलिस महानिदेशक से इंसाफ की फरियाद की तो होश मे आई खाकी ने मुकदमा दर्ज करने की जहमत उठाई। कोतवाली क्षेत्र के तेजगढ़ गांव मे पीड़ित सुरेंद्र सिंह को आरोपियों ने लाइसेंसी बंदूक तथा अवैध असलहों के बल पर उसके दरवाजे चढ़ दिनदहाड़े फायरिंग के जरिए जानलेवा हमला बोला। सुरेंद्र ने किसी तरह हंड्रेड नंबर पुलिस को काॅल किया तो मौके पर पहुंची पुलिस व लोगों के बीच बचाव से उसकी जान बच सकी। पीडित ने कोतवाली मे तहरीर दिया तो रसूखदार विपक्षियों के ऊँची पहुंच को देख स्थानीय खाकी कार्रवाई करने को लेकर हिलने डुलने लगी। हंड्रेड नंबर पुलिस के सामने पीड़ित के दरवाजे पर गोलियों के खोखे व ईंट पत्थर बरामद देखे गये। पर पुलिस ने सुरेंद्र की तहरीर तो जांच के हवाले कर दी। हां आननफानन विपक्षी की तहरीर पर पीड़ित के खिलाफ ही केस दर्ज कर लिया। फिलहाल पीडित ने जब एडीजी इलाहाबाद से मिलकर आपबीती सुनाई तो मंगलवार को कोतवाली पुलिस ने विपक्षियों के खिलाफ जानलेवा हमले और घर मे तोड़फोड तथा बलवा समेत कई मामले मे केस दर्ज किया। एसपी शगुन गौतम ने फिलहाल कोतवाली पुलिस को निष्पक्ष विवेचना की फटकार भी लगाई है। तहरीर के आधार पर कोतवाली के पूरे पाण्डेय कमौरा निवासी विक्रम सिंह, पुष्पेंद्र सिंह व दिनेश मिश्रा तथा बगल गांव तेजगढ़ के अरविंद सिंह समेत सात आठ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जानलेवा हमले समेत कई गंभीर धाराओं मे मुकदमा दर्ज किया गया है। बतादें इसके पहले भी केातवाली पुलिस की लापरवाही पर आरोपियो द्वारा पीडित की पत्नी प्रतिभा सिंह पर भी जानलेवा हमला किया जा चुका है किंतु पुलिस दोनो पक्षो की ओर से मुकदमेंबाजी की जिल्द सजाने के अलावा कोई कारगर कदम आज तक नहीं उठा पा रही है।


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