बाल-किशोर कवि-कवयित्रियों ने बहायी काव्य रसधार
शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ । सृजना साहित्यिक संस्था प्रतापगढ़ द्वारा रंग-पर्व होली के पावन अवसर पर बाल-किशोर कवियों का सम्मेलन सृजनाकुटीर,अजीतनगर में आयोजित किया गया। बच्चों और किशोरों ने अपनी कविता रूपी पिचकारी से ऐसा रंग बहाया कि श्रोता सराबोर हो गए। सबने अपने कवि मित्र जितेन्द्रकुमार मौर्य का जन्मदिन भी मनाया। बुद्ध की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलन के पश्चात बुद्ध वंदना कंचन देवी ने गाया।
होली पर काव्यपाठ का शुभारंभ करते हुए उदीयमान कवयित्री रीतिका मौर्य 'रीतू' ने अपनी रचना से ऊँचाई प्रदान की-------
" पिचकारी में रंग है मन में भरी उमंग।
भेदभाव को भूलो भैया खेलो होली संग।।
कवयित्री प्राची पाण्डेय ने अपनी रचना में प्रेम-सौहार्द का महत्व बताते हुए खूब तालियां बटोरी-------
"होली खुशियों का त्योहार।
आओ मिल बरसाएं प्यार।।
बाल कवयित्री वैष्णवी सिंह प्राकृतिक छटा का अपनी कविता में अनुपम वर्णन किया------" पीली सरसो नीली अलसी धानी है गेहूं की बाली।
हरा-भरा परिधान प्रकृति का गाती कोयल है मतवाली।।
कवयित्री नीरांजलि मौर्य 'परी' ने अपनी हास्य रचना से सबको खूब हँसाया-------
"रिंकी-पिंकी-गोलू-मोलू खेल रहे हैं होली।
चिंटू-पिंटू दौड़ रहे हैं बैठी ममता भोली।।
तरुण कवि जितेन्द्रकुमार मौर्य ने अपनी भावपूर्ण रचना से आभार जताया--------
"जन्मदिवस पर मेरे आकर मंगल गीत सुनाया।
धन्य-धन्य है मेरा जीवन कविता-रस बरसाया।।"
नवोदित कवि ज्ञानेन्द्र मौर्य ने अपनी पंक्तियाँ पढ़कर खतरनाक रासायनिक रंगों तथा तैलीय भोजन से बचने को कहा----------
"रंग-रसायन उचित नहीं है फूलों से तुम होली खेलो।
अन्य बाल कवि--सिद्धांतशेखर, सुरभि सिंह, शिवम, सत्यम, कंचन, शशांक पाण्डेय, तथा निधि ने खूबसूरत कविताएं सुनाकर सबको चकित कर दिया।
मुख्य अतिथि अम्मा साहेब ट्रस्ट के ट्रस्टी आनन्द मोहन ओझा ने कहा कि होली एकता तथा प्रेम का त्योहार है। सबको एक साथ मनाना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार डॉ० दयाराम मौर्य 'रत्न' ने नवोदित रचनाकारों को छंदबद्धता और तुकबंदी के विषय में बताया।कहा कि कविता-लेखन में भाषा,भाव, शैली तथा लयात्मकता का बहुत महत्व है।



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