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सिपाही से माफिया और फिर ब्लाक प्रमुख बने सफेदपोश पर लाखों के इनाम, कुछ ऐसी है पीछे की कहानी




लखनऊ (यूपी). सरकार के 'आपरेशन इनकाउंटर' का खौफ छोटे अपराधियों में ही नहीं बल्कि माफियाओं में भी देखने को मिल रहा है। पूर्वांचल के दर्जन भर ज़िलों में अपनी धाक जमाने वाले अम्बेडकर ज़िले के निवासी ब्लाक प्रमुख अजय सिपाही ने कोर्ट में सरेंडर किया। गैंगेस्टर के एक केस में उसके खिलाफ़ NBW की कायवाई हुई थी जिसमें वो लगातार 24 पेशियों से ग़ैर हाज़िर था। पुलिस की ओर से उस पर लाख रुपए का इनाम भी घोषित था। फैज़ाबाद पुलिस ने 50 हज़ार का इनाम घोषित किया था। माफिया और अब सफेदपोश बने इस सिपाही की ऐसी है।  

प्रशासन की कार्रवाई के डर से कोर्ट में  किया सरेंडर

2006 के दोहरे हत्याकांड में अजय सिंह सिपाही ने जमानत का दुरुपयोग करते हुए फरार हो गया था। गैंगस्टर कोर्ट ने 15 सितम्बर 2015 से कई बार उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारण्ट जारी किया, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। शुक्रवार को उसने विनय कुमार सिंह की कोर्ट में आत्मसमर्पण कर वारण्ट रिकाल की अर्जी दी। कोर्ट ने जमानत का दुरुपयोग करने और मामला गम्भीर होने के कारण रिकाल अर्जी खारिज कर उसे जेल भेज दिया। मुकदमे में अगली सुनवाई 3 अप्रैल को होगी।
अजय सिपाही के अधिवक्ता ने माना है कि शातिर बदमाशों के खिलाफ चल रही प्रशासन की कार्रवाई के डर से उसने कोर्ट में सरेंडर किया है।
वीडियो बयान :कमलेश सिंह (आरोपी अजय सिपाही के अधिवक्ता) १ 


पहली बार 2005 में गया था जेल

अम्बेडकर नगर ज़िले के महरुआ थाना क्षेत्र के लोकनाथपुर गांव निवासी अजय प्रताप सिंह उर्फ़ अजय सिपाही पढ़ाई के दौर से ही काफी तेज़ था। पढ़ाई से लेकर सिपाही की नौकरी के समय तक ज़िले के ही एक बड़े माफिया से उनकी गहरी रंजिश हो गई। जो गर्म स्वभाव के अजय को अखर गई। बतौर सिपाही उसकी पोस्टिंग सुल्तानपुर ज़िले में थी, अपहरण और जानलेवा हमले का आरोप में वर्ष 2005 में वो पहली बार जेल गया। फ़िलहाल अजय इसमें बरी हो गया है। इसी वर्ष 25 जून 2005 को हुए जेलकांड में बंदियों के बीच मारपीट में भी अजय का नाम आया और मुकदमा दर्ज हुआ। 
साल भर बाद ही सुल्तानपुर कोतवाली नगर के सीताकुंड चौराहे पर ठेकेदारी विवाद को लेकर हुए दोहरे हत्याकांड में आनंद प्रकाश सिंह 'बाबी सिंह' और उनके चचेरे भाई जयंत सिंह की हत्या के आरोप में वो दुबारा जेल गया। उस वक़्त अजय सपा एमएलसी के गनर थे। 

वीडियो बयान :कमलेश सिंह (आरोपी अजय सिपाही के अधिवक्ता)२ 


2008 में नौकरी से कर दिया गया बर्खास्त

फिर क्या था जेल की सलाखों से बाहर आने के बाद सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर और आसपास के ज़िलों में एक-एक कर कई मामलों में अजय का नाम जुड़ने लगा और वो अजय सिपाही से अजय माफिया बन गया। 
मौजूदा समय में पूर्वांचल बेल्ट के नामचीन बाहुबलियों में शुमार मुख़्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी, अभय सिंह और अब इन्हीं की श्रेणी में अजय सिपाही का नाम भी जुड़ा है। जिस पर जघन्य अपराध के दर्जन भर से ज़्यादा मुकदमें दर्ज हैं। तेज़ी से जराएम में बढ़ते नाम के कारण 2008 में उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन अजय के कारिबियों की मानें तो अम्बेडकर नगर के जिस माफिया के काकस के कारण वो जराएम की दुनिया में क़दम रखने पर मजबूर हुआ आज उस माफिया को अर्श से वो फर्श पर ला चुका है। 

कहा जाता है ग़रीबों का मसीहा

पुलिस रिकार्ड में अजय सिपाही के खिलाफ राजधानी लखनऊ से लेकर सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर, फैजाबाद 
गोरखपुर, बाराबंकी, इलाहाबाद और आसपास के ज़िलों में भले ही दर्जन भर से अधिक मुकदमें दर्ज हों लेकिन वो इलाके में ग़रीबों का मसीहा कहा जाता है।
अम्बेडकरनगर के टाण्डा, जलालपुर आदि इलाकों में ग़रीब बुनकरों की मदद के लिये उसके दरवाज़े खुले रहते हैं। यही वजह भी है कि आज वो अम्बेडकरनगर के कटेहरी से जहां खुद ब्लाक प्रमुख है वहीं छोटे भाई की पत्नी को उसने ज़िला पंचायत सदस्य बनवाया। यही नहीं माफिया अजय सिपाही निषाद राज पार्टी के चुनाव चिह्न पर कटेहरी विधानसभा से पिछला चुनाव भी लड़ चुका है जहां उसे  लगभग 18000 प्राप्त हुए थे। इस तरह देखते ही देखते एक दशक में अजय सिपाही से सफेदपोश माफिया बन गया। 


ऐसा है अपराधिक इतिहास


  • 30 मई 2005 रंगदारी न देने पर शोभानाथ यादव के अपहरण और जानलेवा हमले का लगा था आरोप। 


  • 24 जून 2006 में ठेकेदारी विवाद को लेकर सुल्तानपुर कोतवाली नगर में हुए आनंद प्रकाश सिंह 'बाबी सिंह' और जयंत सिंह की हत्या का आरोप। 


  • 2007 में राजधानी लखनऊ के बाज़ार खाला में ठेकेदार शत्रुघन सिंह और उनके नौकर की हत्या के केस माफिया अभय सिंह के साथ सिपाही अजय सिंह का भी नाम जुड़ा। 


  • इसके बाद ताबड़तोड़ कई वारदातों के बाद 2010 में अम्बेडकर नगर ज़िले के कटहर की ब्लाक प्रमुख नीलम वर्मा के पति शेष कुमार वर्मा पर फायरिंग कराने का आरोप। 


  • इसी वर्ष 2010 में अम्बेडकर नगर ज़िले के भीटी प्रमुख सुभाष सिंह की हत्या में अजय सिंह पर ही आरोप लगा।


2015 में टांडा से रायबरेली तक
एनएच 232 का चौड़ीकरण करने वाली कंपनी जीकेसी प्रोजेक्टस लिमिटेड कंपनी 
से रंगदारी मांगने के केस में अजय सिपाही को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। केस में ठेकेदार ने अंबेडकरनगर के महरुआ थाने में अजय सिपाही के खिलाफ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। 


  • 24 मार्च 2016 को होली के दिन सुल्तानपुर ज़िले के दोस्तपुर थाना क्षेत्र निवासी मंशाराम यादव की हत्या में मृतक की बुआ ने महरुआ थाने में अजय सिपाही के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में उसने 3 महीने के बाद कोर्ट में सलेंडर किया था।


  • विधानसभा इलेक्शन 2017 में अजय और उनके समर्थकों पर अम्बेडकरनगर में बसपा नेता और पूर्व मंत्री लालजी वर्मा के समर्थकों से मारपीट का आरोप है। 


  • वर्ष 2017 में जिला पंचायत सदस्य  रेखा चौधरी के पति रामचंद्र चौधरी की हत्या की सुपारी दिए जाने के मामले में कोतवाली नगर फैजाबाद में अजय सिपाही समेत अन्य आरोपियों के विरुद्ध धारा 143, 385,  386, 504, 506 के तहत नामजद मुकदमा दर्ज है। दर्ज मुकदमे में माफिया अजय सिपाही को छोड़कर सारे अभियुक्त जेल में हैं। फैजाबाद क्षेत्र के आईजी ओंकार सिंह ने माफिया अजय सिपाही की गिरफ्तारी के लिए तीन दिन पूर्व 50 हजार का इनाम घोषित किया है।
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