अमरजीत सिंह
फैजाबाद।विश्व विख्यात सूफी संत शेख मख़्दूम अहमद अब्दुल हक़ रहमतुल्लाह अलैह का 601 वां उर्स शरीफ बड़े अकीदत व शान ओ शौक़त के साथ मनाया गया जो रूदौली नगर की गंगा जमुनी तहजीब, आपसी मेल मिलाप व भाई चारे का दर्स देने वाले विश्व विख्यात हज़रत शेख मखदूम अब्दुल हक़ रूदौलवी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में लगे मेले में देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों से भी होने वाले इस उर्स में जायरीन आते हैं।
एक सप्ताह तक लगने वाले मेले की शुरुआत एक 1 मार्च को दरगाह शरीफ में महफ़िल ए शमा( कव्वाली) से शुरू हुई जिसमें रामपुर से आये क़व्वाल मोहम्मद अहमद वारसी,जावेद वारसी ने अमीर खुसरो का कलाम पढ़कर महफ़िल में समा बांधा, 2 मार्च को ख़ानक़ाह में रात 9 बजे से महफ़िल ए शमा हुई, 3 मार्च को ख़ानक़ाह पर स्थित मदरसा जामिया चिश्तिया का सालाना जलसा हुआ जिसमें मदरसा चिश्तिया में पढ़ने वाले छात्रों मोहम्मद आतिफ साबरी पुत्र मोहम्मद रज़ा जिला रामपुर भदोही,मोहम्मद शारिब पुत्र मौलाना मोहम्मद इन्तिज़ार रूदौली,मोहम्मद आवेश पुत्र मोहम्मद अकीक खां सरसर फ़ैज़ाबाद, मोहम्मद आतिफ पुत्र मो आरिफ नरौली फ़ैज़ाबाद,मो शुएब साबरी पुत्र मो आलम ठाकुरगंज लखनऊ, मो मुइनुद्दीन पुत्र मुश्ताक अहमद आलमपुर भदोही,मो अरमान पुत्र मो नादिर उमापुर फ़ैज़ाबाद, गुलाम नबी खां पुत्र सुवर्गीय सुहेल खां चन्द्रामऊ फ़ैज़ाबाद,मो,आकिब पुत्र ख्वाजा तस्वीर आलम फकीर टोली फ़ैज़ाबाद, गुलाम मुस्तफा पुत्र मो नसीम अशरफी भागल पुर विहार,मो ताहिर हुसैन पुत्र मो इनायत उल्लाह नबी करीम देहली,मो जैश पुत्र मो फारूक दरभंगा विहार,जुल्फिकार रही पुत्र शमीम अहमद विहार,मामून रशीद पुत्र स्वर्गीय महमुदुर्रहमान विहार,मो,फैज़ान पुत्र मो,फ़िरोज़ खान विहार,मो,इश्तियाक पुत्र मो,दिलावर आलम विहार, मो,हशमतुल्लाह पुत्र बशीरुद्दीन विहार को हाफिज की पगड़ी बांध(दस्तारबंदी)कर डिग्री प्रदान की गई।इसके अलावा हर साल की तरह इस साल भी 2017 के इम्तिहान में प्रथम व द्धितीय स्थान पाने वाली दो छात्राओं नफीसा ताहिरा वल्द मो,अबरार पूरे खान को 85 प्रतिशत व मन्तशा बानों वल्द इरशाद अली मखदूम जादा रुदौली को 83,50प्रतिशत अंक पाने वाली दोनों छात्राओं को पांच पांच हजार रुपये नगद इनाम दिया गया और इसके अलावा महान सूफी संत हज़रत शेख सफी साहब जिनकी मज़ार शरीफ रुदौली में भेलसर रोड पर मौजूद है उनके जीवन पर प्रकाश डालकर उससे आधारित अनवारे सफी का विमोचन मौलाना अशरफ मियां किछौछवी द्वारा समारोहपूर्वक किया गया जिसमें काफी तादाद में सूफी विद्वान मौजूद रहे। इसके बाद महफ़िल ए शमा का आयोजन हुआ जो रात भर चलता रहा।रात में ही 3 बजे ख़ानक़ाह पर सज्जादा नशीन व मुतवल्ली दरगाह शरीफ द्वारा दरगाह शरीफ में चिराग़दान की रस्म अदा की गयी,पहला झुब्बा 3 मार्च को निकला जो उर्स का खास प्रोग्राम जियारते खिरका शरीफ हुआ जो बाद नमाज़ असर साहिबे सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद अली आरिफ उर्फ सुब्बू मियां साहब पहन कर मुख्तलिफ रास्तों से गुजरते हुए दरगाह शरीफ जाकर फिर हुजरए खास में वापस आये इस मौके पर उन रास्तों पर और छतों पर उनके अकीदत मंदों की बहुत बड़ी भीड़ रही।इसके बाद जामिया चिश्तिया का जलसा हुआ। नमाज़ फज्र के बाद मज़ार शरीफ का ग़ुस्ल हुआ,दूसरा झुब्बह में 4 मार्च की शाम 4 बजे दरगाह परिसर में हजारों जायरीन एकत्र हुए।दरगाह के सज्जादा नशीन शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ़ नय्यर मियां ने 6 सौ साल पुराना हजरत शेख मख़्दूम अब्दुल हक़ रहमतुल्लाह अलैह का ख़िरक़ा (पवित्र वस्त्र) पहनकर जियारत कराया। इसे चूमने के लिए शेख के अकीदत मंदों व जायरीनों में काफी जबरदस्त होड़ लगी रही।उसके बाद उर्स का समापन हुआ।लेकिन मेला अनवरत चलता रहेगा उर्स की सारी वयवस्था श्रद्धालुओं के खाने से लेकर रहने तक कि सब व्यवस्था शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ़ नय्यर मियां द्वारा ही की जाती है।मेले के दौरान नगर में जायरीनों का रेला उमड़ पड़ा है।कई जिलों से सैकड़ों दुकानदारों की भी भीड़ आ पहुंची है।कौमी एकता के प्रतीक इस मेले में सभी वर्ग व सम्प्रदाय के लोग शिरकत करते हैं। दरगाह पर आने वाले जायरीन कहते हैं कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।हम लोग कहीं भी रहे प्रति वर्ष होने वाले उर्स शरीफ में जियारत के लिए जरूर आते हैं।वहीं रूदौली में रहने वालों के घर-घर में मेहमानों का आना जाना लगा रहता है।उर्स में शिरकत करने के लिए रुदौली नगर के अधिकांश घरों में आये हुए रिश्तेदारों का आना रहता है।
एक सप्ताह तक लगने वाले मेले की शुरुआत एक 1 मार्च को दरगाह शरीफ में महफ़िल ए शमा( कव्वाली) से शुरू हुई जिसमें रामपुर से आये क़व्वाल मोहम्मद अहमद वारसी,जावेद वारसी ने अमीर खुसरो का कलाम पढ़कर महफ़िल में समा बांधा, 2 मार्च को ख़ानक़ाह में रात 9 बजे से महफ़िल ए शमा हुई, 3 मार्च को ख़ानक़ाह पर स्थित मदरसा जामिया चिश्तिया का सालाना जलसा हुआ जिसमें मदरसा चिश्तिया में पढ़ने वाले छात्रों मोहम्मद आतिफ साबरी पुत्र मोहम्मद रज़ा जिला रामपुर भदोही,मोहम्मद शारिब पुत्र मौलाना मोहम्मद इन्तिज़ार रूदौली,मोहम्मद आवेश पुत्र मोहम्मद अकीक खां सरसर फ़ैज़ाबाद, मोहम्मद आतिफ पुत्र मो आरिफ नरौली फ़ैज़ाबाद,मो शुएब साबरी पुत्र मो आलम ठाकुरगंज लखनऊ, मो मुइनुद्दीन पुत्र मुश्ताक अहमद आलमपुर भदोही,मो अरमान पुत्र मो नादिर उमापुर फ़ैज़ाबाद, गुलाम नबी खां पुत्र सुवर्गीय सुहेल खां चन्द्रामऊ फ़ैज़ाबाद,मो,आकिब पुत्र ख्वाजा तस्वीर आलम फकीर टोली फ़ैज़ाबाद, गुलाम मुस्तफा पुत्र मो नसीम अशरफी भागल पुर विहार,मो ताहिर हुसैन पुत्र मो इनायत उल्लाह नबी करीम देहली,मो जैश पुत्र मो फारूक दरभंगा विहार,जुल्फिकार रही पुत्र शमीम अहमद विहार,मामून रशीद पुत्र स्वर्गीय महमुदुर्रहमान विहार,मो,फैज़ान पुत्र मो,फ़िरोज़ खान विहार,मो,इश्तियाक पुत्र मो,दिलावर आलम विहार, मो,हशमतुल्लाह पुत्र बशीरुद्दीन विहार को हाफिज की पगड़ी बांध(दस्तारबंदी)कर डिग्री प्रदान की गई।इसके अलावा हर साल की तरह इस साल भी 2017 के इम्तिहान में प्रथम व द्धितीय स्थान पाने वाली दो छात्राओं नफीसा ताहिरा वल्द मो,अबरार पूरे खान को 85 प्रतिशत व मन्तशा बानों वल्द इरशाद अली मखदूम जादा रुदौली को 83,50प्रतिशत अंक पाने वाली दोनों छात्राओं को पांच पांच हजार रुपये नगद इनाम दिया गया और इसके अलावा महान सूफी संत हज़रत शेख सफी साहब जिनकी मज़ार शरीफ रुदौली में भेलसर रोड पर मौजूद है उनके जीवन पर प्रकाश डालकर उससे आधारित अनवारे सफी का विमोचन मौलाना अशरफ मियां किछौछवी द्वारा समारोहपूर्वक किया गया जिसमें काफी तादाद में सूफी विद्वान मौजूद रहे। इसके बाद महफ़िल ए शमा का आयोजन हुआ जो रात भर चलता रहा।रात में ही 3 बजे ख़ानक़ाह पर सज्जादा नशीन व मुतवल्ली दरगाह शरीफ द्वारा दरगाह शरीफ में चिराग़दान की रस्म अदा की गयी,पहला झुब्बा 3 मार्च को निकला जो उर्स का खास प्रोग्राम जियारते खिरका शरीफ हुआ जो बाद नमाज़ असर साहिबे सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद अली आरिफ उर्फ सुब्बू मियां साहब पहन कर मुख्तलिफ रास्तों से गुजरते हुए दरगाह शरीफ जाकर फिर हुजरए खास में वापस आये इस मौके पर उन रास्तों पर और छतों पर उनके अकीदत मंदों की बहुत बड़ी भीड़ रही।इसके बाद जामिया चिश्तिया का जलसा हुआ। नमाज़ फज्र के बाद मज़ार शरीफ का ग़ुस्ल हुआ,दूसरा झुब्बह में 4 मार्च की शाम 4 बजे दरगाह परिसर में हजारों जायरीन एकत्र हुए।दरगाह के सज्जादा नशीन शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ़ नय्यर मियां ने 6 सौ साल पुराना हजरत शेख मख़्दूम अब्दुल हक़ रहमतुल्लाह अलैह का ख़िरक़ा (पवित्र वस्त्र) पहनकर जियारत कराया। इसे चूमने के लिए शेख के अकीदत मंदों व जायरीनों में काफी जबरदस्त होड़ लगी रही।उसके बाद उर्स का समापन हुआ।लेकिन मेला अनवरत चलता रहेगा उर्स की सारी वयवस्था श्रद्धालुओं के खाने से लेकर रहने तक कि सब व्यवस्था शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ़ नय्यर मियां द्वारा ही की जाती है।मेले के दौरान नगर में जायरीनों का रेला उमड़ पड़ा है।कई जिलों से सैकड़ों दुकानदारों की भी भीड़ आ पहुंची है।कौमी एकता के प्रतीक इस मेले में सभी वर्ग व सम्प्रदाय के लोग शिरकत करते हैं। दरगाह पर आने वाले जायरीन कहते हैं कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।हम लोग कहीं भी रहे प्रति वर्ष होने वाले उर्स शरीफ में जियारत के लिए जरूर आते हैं।वहीं रूदौली में रहने वालों के घर-घर में मेहमानों का आना जाना लगा रहता है।उर्स में शिरकत करने के लिए रुदौली नगर के अधिकांश घरों में आये हुए रिश्तेदारों का आना रहता है।
गाय से भी था लगाव
मख़्दूम साहब एक गाय पाले हुए थे उससे वह बहुत प्रेम करते थे जब गाय की मृत्यु हो गई तो मख़्दूम साहब को बहुत दुख हुआ और उन्होंने अपने पास ही दरगाह शरीफ के अंदर गाय को दफन किया जिसकी क़ब्र आज भी मौजूद है। आप की ख़ानक़ाह पर बसंत भी मनाया जाता है। क़व्वाल सरसों के फूल और आम की बौर लेकर आते हैं और बसंत पर हज़रत अमीर खुसरो द्वारा कहे गए गीत गाते है।
नौ महीने सरयू नदी में की तपस्या
हज़रत शेख मख़्दूम अहमद अब्दुल हक़ रहमतुल्लाह अलैह हमेशा अल्लाह की इबादत में लीन रहते थे आप ने फैजाबाद की अयोध्या सरयू नदी में एक पैर पर खड़े होकर 9 महीने तपस्या की इस दौरान मछलियों ने पैर का मांस खा लिया था फिर भी उन्होंने तपस्या नहीं छोड़ी नौ महीना पूरा होते ही हज़रत अली की तरफ से बतौर इनाम दुवा ए हैदरी प्राप्त हुई।जिससे उनके पैर पुनः पहले की तरह हो गए।
अजमेर दरगाह शरीफ कमेटी के सदस्य भी हैं
दरगाह शरीफ के सज्जादा नशीन व मुतवल्ली शाह अम्मार अहमद अहमदी नय्यर मियां दरगाह कमेटी अजमेर शरीफ के सदस्य हैं अजमेर दरगाह शरीफ की कमेटी में पूरे भारत से केवल नौ सदस्य ही चुने जाते हैं।वहीं नय्यर मियां आल इंडिया उलेमा मशायक बोर्ड के उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ के इंचार्ज ईद गाह कमेटी जामा मस्जिद रुदौली के अध्यक्ष भी है।
अरकुन निशा की मिलती है अचूक दवा
आरकुन निशा जैसी घातक बीमारी की अचूक दवा फ्री में दी जाती है । फकीर की बक्शी हुई दो खुराक दवा का प्रयोग करने से ही अरकुन निशा जैसी घातक बीमारी जड़ से ही समाप्त हो जाती है।इस दवा के लिए प्रतिदिन देश, प्रदेश के कई जिले से पीड़ित लोग आते हैं और दवा खाकर मर्ज से शिफा याब होते हैं।

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