लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खनन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए जाने के बाद गृह विभाग ने पुलिस वसूली की शिकायतों पर शिकंजा कसने की ओर कदम बढ़ाया है। अब स्थानीय पुलिस अथवा डायल 100 के पुलिसकर्मी मिट्टी अथवा बालू के अवैध खनन/परिवहन की जांच/चेकिंग स्वत: संज्ञान लेकर नहीं कर सकेंगे। 1 गृह विभाग ने शासनादेश जारी कर अवैध खनन की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई को स्पष्ट किया है। सभी डीएम व एसएसपी/एसपी को निर्देश जारी कर इनका अनुपालन कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि डायल 100 के लखनऊ स्थित केंद्र पर मिट्टी/बालू/मौरंग के अवैध खनन अथवा परिवहन की सूचना प्राप्त होने पर उसे संबंधित पुलिस क्षेत्रधिकारी को अवगत कराया जाएगा। पुलिस क्षेत्रधिकारी सूचना को खनन विभाग द्वारा गठित टास्क फोर्स के संज्ञान में लाते हुए प्रभावी जांच व कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। थाना स्तर पर अवैध खनन की सूचना/शिकायत प्राप्त होने पर थानाध्यक्ष उसकी सूचना तत्काल एसडीएम/सीओ को देंगे, जो टास्क फोर्स के जरिए कार्रवाई करायेंगे। पुलिस सुरक्षा/यातायात प्रबंधन के लिए बनाए गए चेकिंग बैरियर पर अवैध खनन अथवा परिवहन की जांच खुद से नहीं करेगी। किसी भी जरिए से चेकिंग बैरियर पर अवैध वसूली की शिकायत हासिल होने पर सीओ अथवा उनसे उच्च स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा सीधे कार्रवाई करते हुए इसकी रिपोर्ट तत्काल एसएसपी/एसपी को दी जाएगी। जिससे संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। अन्य विभाग द्वारा बनाए गए चेकिंग बैरियर पर पुलिस केवल सुरक्षा के लिए तैनात रहेगी। पुलिस संबंधित विभाग से जुड़ी किसी प्रकार की चेकिंग नहीं करेगी। ऐसे चेकिंग बैरियर पर यदि वसूली होती है और पुलिसकर्मियों द्वारा इसकी पूर्व सूचना संबंधित सीओ व एसडीएम को दी जाती है तो उन्हें दोषी नहीं माना जाएगा। अन्यथा वहां तैनात पुलिसकर्मियों की भी अवैध वसूली में संलिप्तता मानी जाएगी। विशेष सचिव अभिषेक प्रकाश ने बताया कि सभी जिलों के खनन अधिकारी अपने जिले के सभी थानेदारों को खनन के पट्टों के स्थानों की सूचना उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद यदि किसी थानाक्षेत्र में चिह्न्ति पट्टे के अतिरिक्त किसी अन्यत्र स्थान पर संगठित/वृहद खनन की सूचना प्राप्त होती है तो और इस बाबत थानेदार द्वारा एसएसपी/एसपी को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई होगी, तो उसकी संलिप्तता भी मानी जाएगी।राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खनन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए जाने के बाद गृह विभाग ने पुलिस वसूली की शिकायतों पर शिकंजा कसने की ओर कदम बढ़ाया है। अब स्थानीय पुलिस अथवा डायल 100 के पुलिसकर्मी मिट्टी अथवा बालू के अवैध खनन/परिवहन की जांच/चेकिंग स्वत: संज्ञान लेकर नहीं कर सकेंगे। 1 गृह विभाग ने शासनादेश जारी कर अवैध खनन की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई को स्पष्ट किया है। सभी डीएम व एसएसपी/एसपी को निर्देश जारी कर इनका अनुपालन कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि डायल 100 के लखनऊ स्थित केंद्र पर मिट्टी/बालू/मौरंग के अवैध खनन अथवा परिवहन की सूचना प्राप्त होने पर उसे संबंधित पुलिस क्षेत्रधिकारी को अवगत कराया जाएगा। पुलिस क्षेत्रधिकारी सूचना को खनन विभाग द्वारा गठित टास्क फोर्स के संज्ञान में लाते हुए प्रभावी जांच व कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। थाना स्तर पर अवैध खनन की सूचना/शिकायत प्राप्त होने पर थानाध्यक्ष उसकी सूचना तत्काल एसडीएम/सीओ को देंगे, जो टास्क फोर्स के जरिए कार्रवाई करायेंगे। पुलिस सुरक्षा/यातायात प्रबंधन के लिए बनाए गए चेकिंग बैरियर पर अवैध खनन अथवा परिवहन की जांच खुद से नहीं करेगी। किसी भी जरिए से चेकिंग बैरियर पर अवैध वसूली की शिकायत हासिल होने पर सीओ अथवा उनसे उच्च स्तर के पुलिस अधिकारी द्वारा सीधे कार्रवाई करते हुए इसकी रिपोर्ट तत्काल एसएसपी/एसपी को दी जाएगी। जिससे संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। अन्य विभाग द्वारा बनाए गए चेकिंग बैरियर पर पुलिस केवल सुरक्षा के लिए तैनात रहेगी। पुलिस संबंधित विभाग से जुड़ी किसी प्रकार की चेकिंग नहीं करेगी। ऐसे चेकिंग बैरियर पर यदि वसूली होती है और पुलिसकर्मियों द्वारा इसकी पूर्व सूचना संबंधित सीओ व एसडीएम को दी जाती है तो उन्हें दोषी नहीं माना जाएगा। अन्यथा वहां तैनात पुलिसकर्मियों की भी अवैध वसूली में संलिप्तता मानी जाएगी। विशेष सचिव अभिषेक प्रकाश ने बताया कि सभी जिलों के खनन अधिकारी अपने जिले के सभी थानेदारों को खनन के पट्टों के स्थानों की सूचना उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद यदि किसी थानाक्षेत्र में चिह्न्ति पट्टे के अतिरिक्त किसी अन्यत्र स्थान पर संगठित/वृहद खनन की सूचना प्राप्त होती है तो और इस बाबत थानेदार द्वारा एसएसपी/एसपी को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई होगी, तो उसकी संलिप्तता भी मानी जाएगी।


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