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सीएम साहब :मजरा छुरी बगिया के लोग ढिवरी युग से मांग रहे आजादी


नवल किशोर पाण्डेय


गोंडा तरबगंज |आजादी के 71 वर्ष बाद भी ग्रामपंचायत भिखारी पुर के मजरा छुरी बगिया में नहीं पहुंची बिजली भारत की आत्मा गांवों में बसती है। सरकार ने गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। हम चलते हैं जनपद के तहसील तरबगंज के ग्रामपंचायत भिखारी पुर के मजरा छुरी बगिया में जहां आज तक बिजली नहीं पहुंची है। बिजली के इंतजार में बच्चे बूढ़े हो गए लेकिन बिजली नहीं पहुंची। यहां के लोग आज भी ढिबरी युग में जीने को मजबूर है।



75 वर्षीय गंगा राम दुबे बताते हैं कि गांव की व्यवस्था को नजदीक से देखा है और समझा है। जन्म से लेकर आज तक ढिवरी युग में जी रहे है। कुछ दिनों में स्वर्ग भी सिधार जाएंगे पता नहीं उस समय तक भी गांव में बिजली जलेगी अथवा नहीं। बगल के पूरे मोहन गांव में बिजली जलते देख लालसा बढ़ती है लेकिन कुछ नहीं कर सकता। हालत यह है कि बिजली से संचालित उपकरण यहां नहीं चलते हैं गांव के लोग मोबाइल चार्ज कराने के लिए तरबगंज बाजार जाते हैं।
68 वर्षीय राघोराम दुबे ने कहा   बरसात के दिनों में गांव में जल जमाव हो जाता है। पक्की रोड न होने के कारण पगडंडी से चलने को मजबूर है।
युवक रवि कुमार दुबे कहते है कि गांव की आबादी 250 की है लेकिन यहां गिने चुने करीब 5 बच्चे ही मैट्रीक पास है। सरकारी नौकरी न मिलने के कारण नवयुवक लोग मुम्बई और सूरत जैसे शहर की ओर पलायान कर रहे है।
युवक मोनू दुबे ने बताया कि उनके कई पूर्वज स्वर्ग सिधार गए लेकिन गांव में बिजली नहीं पहुंची। बिजली के लिए प्रशासनिक अधिकारी से कई बार लोगों ने गुहार लगाई। पर किसी ने भी इस मजरे की तरफ मुड़कर नहीं देखा। इस गांव के लोगों की एक पीढ़ी ने अंधरे में अपना जीवन बीता दिया।
अंधेरे में धूमिल हो रहा बच्चों का भविष्य बच्चों की बात करें तो सूरज के साथ ही इनका भविष्य तय होता है। जब तक सूरज कि रोशनी है तब तक इनकी पढ़ाई लिखाई हो पाती है। सूरज ढ़लने के बाद बच्चे किताबें बंद कर अंधेरे के साथ अपने भविष्य को ढ़क देते हैं। लैंप की रोशनी में कुछ होनहार अपने सपने पुरा करने की जद्ददोजहद भी करते रहते हैं।
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