खुर्शीद खान
सुलतानपुर: दशक भर पहले सरकारी काम-काज में बाधा और गाली-गलौज के केस में सदर सीट से पूर्व विधायक अरूण वर्मा ने कोर्ट में सरेंडर किया। प्रभारी सीजेएम राहुल प्रकाश ने पूर्व विधायक के खिलाफ जारी वारंट को निरस्त करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। दरअस्ल तत्कालीन बसपा शासन काल मे डेरा डालो, घेरा डालो आंदोलन के दौरान पूर्व विधायक पर केस दर्ज हुआ था।
BSP सरकार में डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन का मामला
आपको बता दें कि बीएसपी की सरकार में समाजवादी पार्टी ने डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन छेड़ा था।
23 अक्टूबर 2008 को ये आंदोलन तिकोनिया पार्क में आयोजित हुआ था।
आंदोलन के दौरान सपा एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव, पूर्व विधायक अरूण वर्मा समेत 98 सपा वर्कर्स के विरुद्ध सरकारी कामकाज में बाधा डालने, गाली गलौज देने का आरोप मढते हुए तत्कालीन कोतवाल कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने स्थानीय कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
इसी मामले में आरोपित पूर्व सपा विधायक अरूण वर्मा कई पेशियों से गैर हाजिर चल रहे थे।
जिस पर मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आरोपित पूर्व विधायक के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी किया था।
अरूण वर्मा ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया, जिनकी तरफ से प्रस्तुत वारंट रिकाॅल अर्जी को स्वीकार करते हुए प्रभारी सीजेएम राहुल प्रकाश ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।
मामले में सुनवाई के लिए आगामी 4 मई की तिथि तय है।


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