सुनील उपाध्याय
बस्ती : आजादी के बाद से अब तक करीब 47 लाख लोग सड़क हादसों में असमय मौत के शिकार हो गये हैं। घटनाओं से करीब चार गुना लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुये होंगे। वर्तमान में प्रति वर्ष करीब डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में काल कलवित हो सरे हैं। आंकड़े हैरान करने वाले हैं, इसे सड़क सुरक्षा जन जागरूकता कार्यक्रमों के जरिये रोका जा सकता है।
यह बातें आरटीओ डा. आरके विश्वकर्मा ने कहीं। वे आरटीओ कार्यालय परिसर में बने यातायात पार्क में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। डा. विश्वकर्मा ने कहा ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से काफी हद तक जागरूकता आई है। इस प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से स्कूलों में नोडल शिक्षक नियुक्त किये गये है, जिनका दायित्व स्कूली बच्चें को यातायात नियमों के प्रति सजग करना है। इसका भी व्यापक असर दिख रहा है। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों के संचालित किये जाने का मकसद है कि बच्चे अभिभावकों को प्रेरित करें जिससे वे वाहन चलाते वक्त सीट बेल्ट व हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
उन्होने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये मिले परोक्ष अपरोक्ष सहयोग के लिये सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदीश मिश्रा व संचालन एडवोकेट आरके उपाध्याय ने किया। मुख्य अतिथि धीरेन्द्र शुक्ला ने कहा वाहन चलाते समय यातायात नियमों की जानकारी के साथ ही ट्राफिक सेंस और संवेदनशीलता जरूरी होती है। यह समझना जरूरी होता है कि सभी का जीवन अपनी तरह महत्वपूर्ण है इसलिये अपने बचाव के साथ दूसरों का भी बचाव करना चाहिये।
इस अवसर पर पत्रकार पुनीत दत्त ओझा, अनिल भेलखा, अशोक श्रीवास्तव, रजनीश त्रिपाठी, अरूणेश श्रीवास्तव, महेन्द्र तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, प्रेमनाथ गोंड तथा वाहन चालकों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आरटीओ प्रवर्तन अनिल कुमार श्रीवास्तव, एआरटीओ अरूण कुमार, एआरटीओ प्रशासन अरूण प्रकाश चौबे, पीटीओ रामसागर, एडवोकेट प्रदीप पाण्डेय आदि ने भी सम्बोधित कर लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति लेगों को सजग किया। मौके पर धर्मेन्द्र कुमार, सभाजीत पाल, अनुज प्रधान, राकेश तिवारी, शिवानंद सिंह, कमला प्रसाद, बच्चू लाल, विनोद कुमार, शिवकुमार आदि मौजूद थे।


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