अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाकर एक ओर जहां बेटियों के संरक्षण के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं वहीं आज भी दूषित समाज और दूषित मानसिकता वाले लोग बेटे और बेटियों में भेद समाप्त नहीं कर पा रहे हैं जिसका नतीजा आए दिन मासूम लड़कियों के साथ हो रहे अत्याचार वह भेदभाव के रूप में सामने आता है । ताजा मामला कोतवाली नगर क्षेत्र का है जहां पर एसपी आवास से कुछ ही दूरी पर पंचायत उद्योग केंद्र के ठीक सामने झाड़ियों के बीच में आज 1 वर्षीय मासूम लड़की लावारिस स्थिति में पाई गई । लगभग 1 वर्ष की इस मासूम बच्ची को किसी कलयुगी मां ने मरने के लिए झाड़ियों के बीच छोड़ दिया था । कुछ बच्चे बकरियां चराने झाड़ियों के बीच गए थे और वहां उन्होंने एक मासूम बच्ची को पानी में बैठे हुए देखा जिसकी सूचना सामने बने पंचायत उद्योग केंद्र पर आ कर दी ।
वहां पर मौजूद महिलाओं ने बच्चों की सहायता से मासूम बच्ची को पानी से बाहर निकलवाया तथा पास के पुलिस अधीक्षक आवास पर जाकर घटना की सूचना दी जिसके बाद 100 नंबर पुलिस को सूचना दी गई और पीआरवी 2466 तत्काल वहां पहुंची । पीआरवी के प्रभारी वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि लावारिस बच्ची को कब्जे में लिया गया तथा महिला हेल्पलाइन 181 को सूचना दी गई जिस पर महिला हेल्पलाइन सदस्य ममता ने आकर बच्ची को अपने कस्टडी में ले लिया है । ममता का कहना है की बच्ची का मेडिकल चेकअप कराने के बाद उसे बाल शिशु संरक्षण केंद्र गोंडा भेज दिया जाएगा । घटना की चश्मदीद पंचायत उद्योग केंद्र पर कार्यरत सफाई कर्मी सुनीता ने बताया की सोमवार की दोपहर उद्योग केंद्र के सामने पड़े खाली जमीन पर लगे झाड़ झंकारों के बीच कुछ बच्चे बकरियां चराने गए थे । उन्होंने शोर मचाते हुए आकर यहां केंद्र पर बताया कि एक छोटी सी बच्ची पानी में बैठी हुई है जिसके आसपास कोई नहीं है । बच्चों की सहायता से लावारिस बच्ची को पानी से बाहर निकलवा कर पंचायत उद्योग केंद्र पर लाया गया तथा घटना की सूचना पुलिस अधीक्षक आवास जो बगल में ही है वहां पर जा कर दिया गया । सूचना पाकर पुलिसकर्मी मौके पर आए और महिला पुलिसकर्मियों ने नए कपड़े लाकर उस बच्ची को पहनाया तथा पीआरबी 2466 के प्रभारी वीरेंद्र कुमार मिश्र व उनके सहयोगियों ने 181 नंबर महिला हेल्पलाइन को सूचित किया । सूचना के बाद पहुंची महिला हेल्पलाइन की सदस्यों ने लावारिस बच्ची को अपने साथ लेकर बाल शिशु कल्याण केंद्र के लिए चले गए । कहीं न कहीं तमाम प्रयासों के बावजूद भी बेटा और बेटियों के बीच भेदभाव अभी भी समाज में पनप रहा है जिसे समाप्त करना नितांत आवश्यक है ।
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