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सरकारी तन्त्र का कमाल,भष्टाचार आदेश में बना रोड़ा


रमेश कुमार मिश्र
तरबगंज गोण्डा।वाहरे योगी सरकार का सरकारी तन्त्र जो सुधरने का नाम नही लेरहा है।बेलगाम होचुके अधिकारी वा कर्मचारी सरकारी तन्त्र को सुधरने ही नही देना चाहते है।अब सवाल ये उठता है की क्या योगी सरकार के बेलगाम नौकरशाह कोई रिकार्ड बनाना चाहते है।जो गिनीजबुक में दर्ज हो और सरकार की वाहवाही हो।की भष्टाचार के कारण सरकारी तन्त्र कितना गिर चुका है।
योगी सरकार के सारे आदेश हवा हवाई शाबित हो रहे है।जो जनता के जेहन में घर बनाचुका है।जिसका खामियाजा 2019के चुनाव में सरकार को मिल जायेगा।जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण है यूपी के दो उप चुनाव।
बताते चले की सरकारी तन्त्र की असलियत क्या है।
असलियत सरकारी गल्ला गोदाम किराये की फाईल।जो गल्ला गोदाम तरबगंज में बना है।लगभग सात महीने से ज्यादा हो चुका है बने हुए लेकिन आजतक गोदाम मालिक को किराया नही मिला।किराये की फाईल लगभग एक महीने से गोण्डा कार्यालय में घूम रही है।लेकिन भष्टाचार में लिप्त सरकारी कारीन्दे फाईल पास करवाने की जहमत नही उठा रहे है।और तो और 13/03/18 को फाईल कमिशनर कार्यालय भेजी जाती है।20/03/18 को फाईल पर आपत्ति लगादी जाती है।की भाड़ा ज्यादा है।जबकि 7माह पहले हुए एग्रीमेंट में भाड़ा निर्धारित हो चुका है।20/03/18 की फाइल आर एफ सी कार्यालय 26/03/18 को पहुँचती है।समीक्षा के लिए।और पुनः आर एफ सी कार्यालय से 28/03/18 को फाईल कमिशनर कार्यालय भेज दी जाती है।जो लिपिक द्वारा की जारही मनमानी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।ये है हमारे योगी सरकार की उपलब्धि।
जबकि नियम है की एक कार्यालय में कोई भी फाईल तीन दिन से ज्यादा ना रोकी जाय।फिर भी भष्टाचार चरम पर सिर उठाकर बोल रहा है।
क्या कहते है जिम्मेदार।
आर एफ सी (मंडलीये खाद्दान अधिकारी)राजेश कुमार ने बताया की इसमे हम क्या कर सकते है।ये सरकारी तन्त्र है।जहाँ महीनो लग जाते है फाइल पहुँचने में।ये जनप्रतिनिधियों का कमाल है।जिसे जनता चुनकर भेजती है।
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