अमरजीत सिंह
फ़ैज़ाबाद:अयोध्या प्राइवेट स्कूलों में मनमाने ढंग से महंगी फीस वसूलने को लेकर सरकार ने रोक तो लगाया है ,तो वहीं राजपाल ने भी अपनी मुहर लगा दी है। लेकिन इसके बावजूद भी सरकार द्वारा स्कूल के खिलाफ महंगी फीस पर रोक लगाने का फैसला कुछ खास रंग नही ला पा रहा है, पहले की ही भांति स्कूल वाले लूट-खसोट करके अवैध तरीके से फीस वसूल रहे हैं उनको सरकार द्वारा कोई भी कार्यवाही करने का डर नहीं है वह किसी भी तरह सरकार द्वारा निर्धारित फीस नहीं ले रहे हैं जबकि सरकार ने आज स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि कोई भी स्कूल ₹20000 सालाना से ज्यादा नहीं ले सकते अगर कोई भी स्कूल इससे ज्यादा लेता है तो उसकी मान्यता रद्द करके उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी यह अधिनियम इसी साल अप्रैल 2018 से लागू है लेकिन स्कूल के संचालक सरकार के इस नए नियम को बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं है वह किसी भी तरह अपने-अपने स्कूलों में फीस कम करने को तैयार नहीं है आपको बताते चलें कि यह स्कूल नेता विधायक उद्योगपति पूंजीपति या किसी माफिया जैसे लोगों का है आखिर क्या बात है कि इनको सरकार का खौफ तक नहीं है आखिर में इनको किसकी दया दृष्टि मिल रही है जिससे इनको किसी का भी डर भय नहीं है और यह अपने अपने स्कूलों में एक अच्छी शिक्षा देने के नाम पर धंधा बिजनेस चलाकर बच्चों के अभिभावक का पैसा लूट खा रहे हैं अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग कैसे अपने बच्चों को पढ़ा लिखा सकेंगे वहीं दूसरी तरफ कोई भी शिक्षा अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है फैजाबाद में कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनके महीने की फीस लगभग 3000 से 8000 महीने तक की है यानी 36000 से 96000 तक की फीस सालाना वसूल रहे हैं आखिर क्या वजह है कि इन स्कूलों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है जबकि सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूल पर महंगी फीस पर अंकुश लगाने का कानून लागू हो चुका है हालांकि अभी भी अभिभावक कहीं ना कहीं यह आस लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द से जल्द स्कूल के संचालकों के खिलाफ कोई बड़ी कानून कार्यवाही करे जिससे तय हुई निर्धारित फीस के अनुसार स्कूल वाले ले सके,और अभिभावक अपने अपने बच्चों को पढ़ा लिखा सकें,क्या सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूल पर महंगी फीस को रोक लगाने का का कानून सिर्फ कागजों तक ही सिमट के रह जाएगा या उस पर जल्द से जल्द कार्रवाई होगी


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