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डॉ. रामकृष्ण लाल के काव्य संकलन पर केन्द्रित परिचर्चा संगोष्ठी में साहित्य की धार और धारा पर विमर्श




सुनील उपाध्याय 
बस्ती। आज का समाज जिन सामाजिक, सांस्कृतिक संकटों से गुजर रहा है ऐसे में देश के गंगा जमुनी संस्कृति को बचाये रखने की जिम्मेदारी कवियों, साहित्यकारों को उठानी होगी। यह विचार वरिष्ठ कवि ए.आर.टी.ओ. डा. शंकरजी सिंह ने प्रेस क्लब में प्रेेम चन्द साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ कृत ‘सच का दस्तावेज’ काव्य संकलन पर केन्द्रित परिचर्चा संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुये व्यक्त किया। 
कहा कि डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ पिछले चार दशक से निरन्तर काव्य रचना के क्षेत्र में सक्रिय है। उनकी ‘चांशनी’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा मिली है। निश्चित रूप से ‘सच का दस्तावेज’ की रचनायें लोगों की जुबान पर उतरेगी और साहित्य के क्षेत्र में यह कृति समादर प्राप्त करेगी। 
विशिष्ट अतिथि समाजसेवी राना दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि डा. जगमग की प्रेरणा से पूर्वान्चल में रचनाकारों की एक पीढी तैयार हुई है। ऐसा श्रेय कम रचनाकारों को मिल पाता है। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये शिक्षा विद त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने कहा कि ‘सच का दस्तावेज’ आज के क्षरित होते जीवन मूल्यों के बीच उम्मीदों की किरण है। 
शिव हर्ष किसान पी.जी. कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामदल पाण्डेय ने काव्य संकलन के मर्म पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये कहा कि एक स्थापित कवि के रूप में जगमग जी की प्रतिष्ठा राष्ट्रीय स्तर पर बढ रही है। वे समर्थ रचनाकार के रूप में भविष्य के प्रति आश्वस्त करते हैं।
समीक्षक डा. रघुवंशमणि त्रिपाठी ने ‘सच के दस्तावेज’ के मुख्य अंशों को उद्धरित करते हुये कहा कि डा. जगमग की रचनाओं में जो विविधता और संप्रेषण की सहजता है वह विरले रचनाकारों में प्राप्त होती है। प्रदीप चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि डा. जगमग के रचना संसार के केन्द्र में आम आदमी का जीवन संघर्ष रचा बसा है। उनके चुटीले व्यंग्य सोचने को विवश करते हैं। आयोजक सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि संक्रमण काल से साहित्यकार ही मुक्ति दिला सकते हैं। साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि डॉ. जगमग संवेदनशील रचनाकार है और उनकी प्रेरणा से जो नयी पौध विकसित हुई है वह साहित्य संसार की धार को कमजोर नहीं होने देगी। विनोद उपाध्याय ने रचनाओं के माध्यम से डा. जगमग के साहित्यक धारा को स्वर दिया। ‘सच के दस्तावेज’ के रचयिता डॉ. ‘जगमग’ ने संकलन की  कुछ रचनाओं का भावुक स्वरों में पाठ किया। 
‘सच का दस्तावेज’ काव्य संकलन पर केन्द्रित परिचर्चा में कमलापति पाण्डेय, श्याम प्रकाश शर्मा, डा. मंजू श्री प्रीती, स्नेहा पाण्डेय, तपानाथ पाण्डेय, डा. ओम प्रकाश पाण्डेय, राम कृपाल पाण्डेय आदि ने सम्बोधित करते हुये विस्तार से विमर्श किया। डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ ने संचालन करते हुये कृति की उपादेयता पर विस्तार से प्रकाश डाला। 
इसी कड़ी में संस्थान की ओर से डा. शंकर जी सिंह, राना दिनेश प्रताप सिंह, डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ डा. अनुराग मिश्र गैर, डा. डी.के. गुप्ता, डा. अजय कुमार श्रीवास्तव, डा. वी.के. वर्मा, तपानाथ पाण्डेय, राम कृपाल पाण्डेय को अंग वस्त्र, सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ के संचालन में द्वितीय सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में ज्योतिमा शुक्ला, रूचि द्विवेदी, आतिश सुल्तानपुरी, ताजीर वस्तवी, ब्रम्हदेव शास्त्री पंकज, शिव सागर, लालमणि प्रसाद, सागर गोरखपुरी, डा. सत्यदेव त्रिपाठी, पंकज सोनी, कलीम वस्तवी, हरीश दरवेश, अजय श्रीवास्तव ‘अश्क’ अफजल हुसेन अफजल, रहमान अली ‘रहमान’ शबीहा खातून, डा. राजेन्द्र सिंह आदि की रचनायें सराही गई। कार्यक्रम में मो. वसीम अन्सारी, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, जगदीश प्रसाद पाण्डेय, मनोज सिंह राना, रणविजय सिंह, संदीप सिंह, जय प्रकाश गोस्वामी, दीपक प्रसाद, सन्तोष कुमार भट्ट के साथ ही बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। 

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