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अयोध्या रामकोट की परिक्रमा करके 84 कोसी परिक्रमार्थी सीताकुंड पर डाला डेरा


वासुदेव यादव
फ़ैजाबाद अयोध्या। श्री अवध धाम की चाैरासी काेसी परिक्रमा पूरी कर मखाैड़ा से लाैटे परिक्रमार्थियाें के जत्थे ने मंगलवार काे सुबह रामकाेट की राम नाम संकीर्तन के साथ ही परिक्रमा किया। प्रात:काल सरयू स्नान व पूजन कर हजाराें की संख्या में साधु-संत व भक्तगणों ने सरयू तट से जय श्री राम उदघाेष के साथ अपनी परिक्रमा प्रारम्भ की। जाे नयाघाट, शास्त्रीनगर, हनुमानगढ़ी चाैराहा, श्रीरामअस्पताल, टेढ़ी बाजार चाैराहा से हाेते हुए, वशिष्ठ कुण्ड, अशर्फी भवन चाैराहा, मातगैंड़ चाैराहा, डाकखाना पर समाप्त हुई। उसके बाद सभी श्रद्धालु रानीबाजार, रायगंज से हाेते हुए सीताकुण्ड के लिए प्रस्थान कर गए। जहां सभी परिक्रमार्थी ने हवन व रामार्चा पूजन किया। परिक्रमा में महिला भक्तगणों की भी संख्या अच्छी खासी रही। इस माैके पर चाैरासी काेसी परिक्रमा संचालक व धर्मार्थ सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त गया दास महराज ने कहा कि यह परिक्रमा अयाेध्या धाम की परम्परागत परिक्रमा है। जाे अनवरत काल से हाेते हुए चली आ रही है। चाैरासी काेसी परिक्रमा प्रतिवर्ष मखाैड़ा धाम से प्रारम्भ हाेती है। यह वही मखाैड़ा धाम है जहां त्रेतायुग में महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ किया था। जाे अयोध्यानगरी से 20 किमी. दूर  उत्तर दिशा में बस्ती जिले में स्थित है। लगभग 265 किमी. परिधि की यह 84 काेसी परिक्रमा पांच जिले बस्ती, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, बाराबंकी, गाेण्डा से हाेकर जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तगण पूरे जाेशाे-खराेश के साथ परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा का समापन जानकी नवमी के दिन अवध धाम के पाैराणिक सीताकुण्ड पर हाेता है। जाे सदियाें से हाेता हुआ चला आ रहा है। 
 उन्हाेंने कहा कि 84 काेसी परिक्रमार्थियाें का जत्था विगत 31मार्च काे नराेत्तम भवन रायगंज से मखाैड़ा धाम के लिए रवाना हुआ था। जहां अगले दिन 1अप्रैल काे परिक्रमा प्रारम्भ हुई। जाे विभिन्न पड़ावाें से हाेते हुए। पुनः मखाैड़ा पहुंची। मखाैड़ा धाम से काफी संख्या में परिक्रमार्थी 23 अप्रैल को रामनगरी पहुंचे और सरयू तट पर डेरा डाला था। इसके अगले दिन मंगलवार काे भक्ताें ने रामकाेट की परिक्रमा कर सीताकुण्ड पर रामार्चा पूजन और हवन करने के बाद परिक्रमा समाप्त किया। महन्त ने कहाकि इस बार परिक्रमा पथ पर परिक्रमार्थियाें काे बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जगह-जगह सड़कें खराब थी और बड़े-बडे़ नुकीले सड़कों पर पड़े रहे। जाे श्रद्धालुओं काे चाेटिल कर जख्म दे रहे थे। यहां तक कि शासन-प्रशासन ने भी हम लाेगाें की किसी प्रकार से मदद नही की। उन्होंने सीताकुंड मंदिर नके नवनिर्माण की माँगनके साथ ही यहां पर अतिक्रमण हटवाने की मांग शासन प्रशासन से की। 
पूरे परिक्रमा क्षेत्र में स्थानीय जनाें ने परिक्रमार्थियाें की खूब सेवा और मदद किया।

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