सुनील उपाध्याय
बस्ती । गोरखपुर से विभाजित होकर अस्तित्व में आये बस्ती जनपद का 153 वां स्थापना दिवस उल्लास के साथ मनाया गया। रविवार को प्रेस क्लब में वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने मांग किया कि मण्डल मुख्यालय पर विश्वविद्यालय की स्थापना किया जाय।
सत्यदेव त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा कि अंग्रेजी हुकूमत में 6 मई 1865 को बस्ती अस्तित्व में आया। बस्ती जनपद को विभाजित कर सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर जनपद स्वरूप में आये और बस्ती मण्डल मुख्यालय तो हो गया किन्तु यहां के नागरिकों को आज भी मण्डल स्तर की सुविधायें नसीब नहीं है।
आयोजक श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम के जन्म के कारक मखौड़ा, महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली और संतकबीर की कर्म एवं निर्वाण स्थली अपने में संजोये बस्ती मण्डल का इतिहास और संस्कृति जितनी समृद्ध है संसाधनों का उतना ही सिमटता जाना चिन्ता का विषय है।
समिति के कोषाध्यक्ष सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि मण्डल मुख्यालय पर एक विश्वविद्यालय होना अपरिहार्य है। जन प्रतिनिधियों को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिये। कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, अमिताभ के पिता हरिवंशराय बच्चन, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, डा. लक्ष्मीनारायण लाल, बालसोम गौतम जैसी व्यक्तित्व का नाता बस्ती से रहा है। इस पहचान को संजोये रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में डा. कमलेश पाण्डेय, मो. वसीम अंसारी, त्रिभुवन प्रसाद मिश्र, हंसनाथ राय, ओम प्रकाश मिश्र, बटुक नाथ शुक्ल, पेशकार मिश्र, साहिद बस्तवी, जगदीश प्रसाद पाण्डेय, शिवशंकर लाल श्रीवास्तव, जय प्रकाश स्वतंत्र, इन्सान अली, सुदामा राय, भद्रसेन सिंह बंधु, मोरध्वज मिश्र, डा. राम मूर्ति चौधरी, शीतला प्रसाद पाण्डेय, पं. चन्द्रबली मिश्र, लालजी पाण्डेय, विक्रमादित्य एडवोकेट, ज्ञानेन्द्र द्विवेदी दीपक, ताजीर बस्तवी, लालमणि प्रसाद, दीपक प्रसाद, हरीश दरवेश, के साथ ही बड़ी संख्या में लोग उपस्थिति रहे। रचनाकारों ने कविताओं के माध्यम से बस्ती के महत्व को रेखांकित किया।


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