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यहां अदब से सजदे में झुकते हैं हिंदुओं-मुस्लिमों के सिर


डॉ0ओ0पी0 भारती/मुस्ताक अहमद
गोण्डा:मंदिर - मस्जिद विवाद से इतर अवध क्षेत्र का एक पहलू यह भी , हजरत रज्जब अली सैय्यद सालार हटीला शाह गाजी - ए - पाक की दरगाह से शिद्दत से बुलंद हो रहा है मानवीय एकता का संदेश 
रामजन्मभूमि - बाबरी मस्जिद को लेकर भले ही दोनों समुदायों के लोग आमने - सामने हों पर अवध क्षेत्र के वजीरगंज में ही एक स्थान ऐसा है , जहां बड़े ही अदब से सजदे में हिंदुओं - मुस्लिमों के सिर साथ - साथ झुकते हैं । यह जिक्र है , रौजा गांव स्थित हजरत सैयद सालार रज्जब अली हटीला शाह गाजी - ए - पाक की दरगाह का । हजरत को पर्दानशीं हुए शताब्दियां गुजर चुकी हैं , पर उनका रुहानी वजूद पूरी शिद्दत से जीवंत है । 

   मान्यता है कि हजरत की चौखट से ,कोई खाली हाथ नहीं लौटता । यदि सदिक दिल से आवाज़ निकलती है , तो दुआ भी मिलनी तय मानी जाती है ।  मिरअते मसऊदी किताब के अनुसार हजरत सैयद सालार मसऊद गाजी  से  मामू  - भांजे का रिश्ता था ,  पर किशोरावस्था से ही वे दुनियादारी से इतर दुनिया के रहबर से मुहब्बत की ओर उन्मुख हुए और राजकीय वैभव - विलास को तिलांजलि दे लंबी यात्रा करते हुए रौजा आ पहुंचे । दरगाह शरीफ के खादिम एवं सूफी - संतों के मुरीद सुलेमान शाह के अनुसार हजरत का रौजा आना महज संयोग नहीं था । हकीकत तो यह है कि यहां की जमीन बहुत ही हसीन और पाक है , यहां कदम नहीं पलक के बल चलना चाहिए और इस रुहानी सच्चाई से ही प्रेरित हो हजरत सैयद सालार रज्जब अली हटीला शाह गाजी ने उस स्थान पर धूमी रमाई होगी , जिसे सदियों से अवध के नाम से जाना जाता है ।  हजरत सैयद सालार रज्जब अली हटीला शाह गाजी की गणना सैयद सालार मसऊद गाजी , शेख मुईनुद्दीन चिश्ती , निजामुद्दीन औलिया , हजरत जहांगीर समनानी , साबिर पिया जैसे शीर्षस्थ सूफी - संतों में होती रही है । 

  मानवीय एकता एवं भाईचारा का संदेश देने वाले हजरत सैयद सालार रज्जब अली हटीला शाह गाजी की दरगाह से भी उनका संदेश शताब्दियों से प्रवाहमान है । आध्यात्मिक गुरु सहदेव मिश्र के अनुसार वैष्णव परंपरा के संतों की ही तरह हजरत  सैयद सालार रज्जब अली हटीला शाह गाजी सरीखे सूफी - संत भी क्षेत्र के गौरव हैं और उनकी शिक्षा भेद - भाव से ऊपर उठकर परम सत्य एवं सत्ता से तादाम्य स्थापित करने की है ।

तीन द्विसीय उर्स आज से
हजरत सैयद सालार रज्जब अली हटीला शाह गाजी की दरगाह पर तीन द्विसीय  सालाना उर्स शुक्रवार से शुरू हो रहा है । शुरुआत गुस्ल मजार - ए - शरीफ , परचमकुशाई एवं कुरान खानी से होगी । अगले दिन गागर , चादर , गुलपोशी व गुरुवार बाद नमाज -ए - इशा तकरीर प्रस्तावित है । उर्स कमेटी के मीडिया प्रभारी हाफिज सगीर अहमद ने बताया कि जलसा के मुख्य अतिथि मसौली के पीर  - ए - तरीकत सैयद गुलजार मियां होंगे ।
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