सुनील उपाध्याय
बस्ती यूपी । जल ही जीवन का आधार है । लेकिन यही जल अगर दुषित हो जाय तो जीना ही मुश्किल हो जाएगा । ताजा रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के बीस से अधिक जिलों का भूजल “आर्सेनिक” प्रदूषित पाया गया है। सर्वे की प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 31 जिले और ऐसे हैं जहाँ यह खतरा हो सकता है, हालांकि उनकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है। डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार पानी में आर्सेनिक की मात्रा प्रति अरब 10 पार्ट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए या प्रति लीटर में 0.05 माइक्रोग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन शोध बताते हैं कि यह इन क्षेत्रों में 100-150 पार्ट प्रति बिलियन तक पानी में आर्सेनिक पहुंच चुका है। बहराईच, चन्दौली, गाज़ीपुर, गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, सन्त कबीर नगर, उन्नाव, बरेली और मुरादाबाद, जिलों में भी आर्सेनिक की अधिक मात्रा पाई गई है, जबकि रायबरेली, मिर्ज़ापुर, बिजनौर, मेरठ, सन्त रविदास नगर, सहारनपुर और गोण्डा आंशिक रूप से प्रभावित जिले हैं । प्रदेश सरकार द्वारा इंडिया मार्का हैण्डपम्प लगाए जा रहे है लेकिन गांवो में अक्सर देखा जाता है कि इन नलों का पानी भी पीने लायक नही है । अब मजबूरी में लोग इन पानी पीने को मजबूर है विभाग समय समय पर जांच व प्रचार प्रसार की बात तो करता है लेकिन जमीन पर इसकी सच्चाई कम ही दिखाई पड़ती है ।


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